छाताबाद में 26 दिन बाद फिर धंसी जमीन, तालाब का पानी जमीन में समाने से ग्रामीणों में दहशत

धनबाद के छाताबाद में भू-धंसाव की समस्या फिर गहरा गई है. काजू बगान में 26 दिन के भीतर दूसरी बार जमीन धंसने से तालाब का पानी फिर जमीन में समा गया. ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और वे स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.

धनबाद. छाताबाद काजू बगान में भू-धंसान की समस्या लगातार चिंता बढ़ा रही है. शनिवार की सुबह तालाब के समीप अचानक जमीन धंसने से गोफ बन गया और देखते ही देखते तालाब का पानी उसमें समाने लगा. पानी के इस तरह जमीन के अंदर जाने से आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गयी. खास बात यह है कि इसी स्थान पर गत 26 अगस्त को भी गोफ बना था, जिसकी बीसीसीएल प्रबंधन ने भराई करायी थी. दोबारा उसी स्थान पर जमीन धंसने से ग्रामीण भराई की व्यवस्था और भू-धंसान की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

26 अगस्त को सूख गया था तालाब

ग्रामीणों के अनुसार, 26 अगस्त को बने गोफ के कारण सती पांडे तालाब का पानी जमीन के अंदर समा गया था और तालाब सूख गया था. अब शनिवार को उसी क्षेत्र में दोबारा गोफ बनने और तालाब का पानी उसमें समाने की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों का कहना है कि पानी का इस तरह लगातार जमीन के अंदर समाना क्षेत्र में भूमिगत स्थिति को लेकर गंभीर चिंता का विषय है.

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पहले भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं करीब दो दर्जन घर

ग्रामीणों ने बताया कि छाताबाद के दूसरे छोर पर सात जुलाई और सात अगस्त को भी भू-धंसान की घटनाएं हुई थीं. इन घटनाओं में करीब दो दर्जन घर क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आयी थी. लगातार हो रही घटनाओं के कारण लोगों में भय का माहौल है. ग्रामीणों ने बीसीसीएल और प्रशासन से पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वे कराने की मांग की है, ताकि भू-धंसान के कारणों और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान हो सके.

बीसीसीएल ने शुरू करायी भराई, स्थल की करायी घेराबंदी

घटना की सूचना मिलने पर क्षेत्रीय सुरक्षा पदाधिकारी नारायण प्रसाद, कोलियरी मैनेजर समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गोफ स्थल की घेराबंदी करायी गयी. बीसीसीएल प्रबंधन के अनुसार, गोफ की भराई का काम शुरू कर दिया गया है. प्रबंधन ने यह भी बताया कि गोफ स्थल से घनी आबादी दूर है और फिलहाल किसी तरह के खतरे की बात नहीं है.

स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि एक ही क्षेत्र में बार-बार भू-धंसान की घटनाएं सामने आ रही हैं. ऐसे में केवल गोफ की भराई करना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने क्षेत्र का तकनीकी सर्वे कराने और भू-धंसान की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि घनी आबादी वाले इलाके में भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

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By Kamdeo singh

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