बीसीसीएल के खनन विस्तार नोटिस से खरखरी में आक्रोश, 10 हजार की आबादी पर क्यों मंडराया खतरा

धनबाद के खरखरी में बीसीसीएल के प्रस्तावित खनन विस्तार को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा है. जमीन अधिग्रहण के नोटिस के बाद स्थानीय लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका दावा है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि 10 हजार लोगों की सुरक्षा और पेयजल संकट से जुड़ा है.

धनबाद. जिले के फुलारीटांड स्थित बीसीसीएल के खरखरी क्षेत्र में हिलटॉप कंपनी के प्रस्तावित खनन विस्तार को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है. जमीन अधिग्रहण को लेकर विभिन्न स्थानों पर नोटिस चिपकाए जाने के बाद खरखरी और नावागढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि रैयती जमीन पर किसी भी परिस्थिति में कब्जा नहीं होने दिया जाएगा. उनकी मांग है कि पहले जमीन का निष्पक्ष सर्वे कर वास्तविक रैयतों का अधिकार तय किया जाए. इसके बाद ही अधिग्रहण या खनन विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए.

कोयला निकासी से भूधंसान का खतरा

ग्रामीणों के अनुसार यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि करीब 10 हजार लोगों की सुरक्षा और पेयजल संकट से भी जुड़ा है. उनका दावा है कि बड़ी आबादी पुराने भूमिगत खदानों के पिलरों के ऊपर बसी है. ऐसे में पिलर कटाई या बड़े पैमाने पर कोयला निकासी से भूधंसान और गोफ बनने की घटनाओं का खतरा काफी बढ़ सकता है.

ये भी पढ़ें: धनबाद गया पुल परियोजना: दिसंबर की डेडलाइन से पहले क्यों फंसा काम? जानें बड़ी वजह

पुराने खदान क्षेत्रों के ऊपर बसी है आबादी

ग्रामीणों का कहना है कि खरखरी बस्ती के नीचे करीब 60 से 70 फीट की गहराई में पूर्व में भूमिगत खनन हुआ है. आसपास 26 नंबर खदान, 27 व 29 नंबर इंक्लाइन, पंचायत सचिवालय के पास 17 नंबर खदान और सुगुडीह खदान के संचालन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन खदानों के पिलरों के ऊपर वर्तमान में घनी आबादी बसी है. पंचायत सचिवालय के आसपास, मुस्लिम टोला और बाउरी टोला के पीछे पूर्व में गोफ बनने और भूधंसान की घटनाएं होने का भी ग्रामीणों ने दावा किया.

सीधा असर आबादी की सुरक्षा पर

ग्रामीणों के मुताबिक, ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में खनन विस्तार से पहले विशेषज्ञों से भूगर्भीय और संरचनात्मक सुरक्षा की जांच कराना बेहद जरूरी है. उनका आरोप है कि कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए पिलर कटाई या अतिरिक्त निकासी की गई तो इसका सीधा असर स्थानीय आबादी की जिंदगी पर पड़ेगा.

2010 में डेंजर जोन, 2015 में रेड डेंजर जोन का दावा

ग्रामीणों का दावा है कि बीसीसीएल प्रबंधन ने वर्ष 2010 में खरखरी क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित किया था. इसके बाद जरेडा की टीम के सर्वे के आधार पर 2015 में इस क्षेत्र को रेड डेंजर जोन घोषित किया गया था. ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि यह क्षेत्र पहले से ही खतरनाक घोषित है, तो खनन विस्तार से पहले आबादी की सुरक्षा के लिए स्पष्ट योजना सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है.

पेयजल की भी गंभीर समस्या

खरखरी बस्ती, बाउरी टोला, मुस्लिम बस्ती, सोनार टोला, लालाबाड़ी, नावागढ़ मोदक टोला और नारायण धौड़ा समेत आसपास के क्षेत्रों में 10 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं. ग्रामीणों के अनुसार कोल बेयरिंग क्षेत्र होने के कारण खरखरी बस्ती में सरकारी चापाकल तक नहीं लग सका है. निजी बोरिंग कराने पर भी पानी नहीं मिलता. बड़ी आबादी माथाटांड स्थित खरखरी जलापूर्ति योजना पर निर्भर है. ग्रामीणों का कहना है कि खनन के दौरान बड़े पैमाने पर जल निकासी से भूमिगत जलस्तर घटा, तो पेयजल संकट और विकराल हो जाएगा.

रैयती जमीन पर बीसीसीएल की दावेदारी का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि हिलटॉप विस्तार को लेकर बीसीसीएल ने कुछ स्थानों पर नोटिस चिपकाए हैं, जिनमें जमीन को बीसीसीएल की बताते हुए भूधंसान प्रभावित क्षेत्र का उल्लेख किया गया है. ग्रामीणों का दावा है कि इसमें रैयती जमीन भी शामिल है. उन्होंने जमीन का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, निष्पक्ष सर्वे कराने और वास्तविक रैयतों का अधिकार स्पष्ट करने की मांग की है.

बीसीकेयू ने दी आंदोलन की चेतावनी

बीसीकेयू के केंद्रीय उपाध्यक्ष शेख रहीम ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए रैयत ग्रामीणों और कॉलोनीवासियों पर दबाव बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पहले भी हिलटॉप कंपनी के खिलाफ आंदोलन हो चुका है. अब रैयत, कॉलोनीवासी और बेरोजगार युवक कंपनी की कथित मनमानी के खिलाफ एकजुट होकर चरणबद्ध आंदोलन करेंगे.

रैयती जमीन का अधिकार तय करने पर अड़े ग्रामीण

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि पहले रैयती जमीन का अधिकार तय किया जाए, भूगर्भीय सुरक्षा की जांच हो, स्थायी पेयजल व्यवस्था बने और रोजगार व पुनर्वास की स्पष्ट नीति घोषित की जाए. इसके बाद ही खनन विस्तार पर कोई निर्णय लिया जाए. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि बिना सुरक्षा मानकों और अधिकार तय किए जबरन कब्जे की कोशिश हुई तो सामूहिक आंदोलन किया जाएगा.

ये भी पढ़ें: धनबाद के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर, 30 नए सबस्टेशन से खत्म होगी लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Ajay prasad

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >