धनबाद सहित झारखंड के 11 जिलों में खरीफ मौसम 2026 के लिए बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों का पंजीयन शुरू हो गया है. योजना के तहत अगहनी धान और भदई मकई की फसलों को बीमा सुरक्षा प्रदान की जा रही है. ऋणी और गैर-ऋणी दोनों श्रेणी के किसान 31 अगस्त तक अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं.
11 जिलों में लागू है योजना
योजना के अंतर्गत दुमका, जामताड़ा, धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग, गुमला, लोहरदगा, गढ़वा, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले अधिसूचित किये गये हैं. फसल बीमा की इकाई ग्राम पंचायत निर्धारित की गयी है, जिसके आधार पर नुकसान का आकलन किया जायेगा.
किसानों को देना होगा मात्र एक रुपये का टोकन
अधिसूचित फसलों के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर केवल एक रुपये का टोकन शुल्क देना होगा. बीमा कराने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति, भूमि स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, वंशावली, बटाईदार होने की स्थिति में नोटरीकृत बटाई प्रमाण पत्र, धान की बुवाई का स्व-सत्यापित प्रमाण पत्र तथा मोबाइल नंबर जमा करना होगा.
बैंक और प्रज्ञा केंद्रों पर उपलब्ध है सुविधा
किसान अपने नजदीकी बैंक, सहकारी बैंक शाखा, प्रज्ञा केंद्र अथवा संबंधित बीमा कंपनी के कार्यालय में जाकर फसल बीमा करा सकते हैं. योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी भारत सरकार के फसल बीमा पोर्टल पर भी उपलब्ध है. किसानों से निर्धारित प्रीमियम के अतिरिक्त कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जायेगा.
फसल कटाई के बाद भी मिलेगी सुरक्षा
योजना के तहत खेत में काटकर रखी गयी अथवा सुखाने के लिए फैलायी गयी फसल को भी बीमा सुरक्षा मिलेगी. ओलावृष्टि, चक्रवाती बारिश और बेमौसम वर्षा से होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा लाभ दिया जायेगा. यह सुविधा फसल कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक लागू रहेगी. नुकसान होने पर किसान को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना संबंधित एजेंसी को देनी होगी.
प्रतिकूल मौसम में भी मिलेगा मुआवजा
योजना में प्रतिकूल मौसम की स्थिति को भी शामिल किया गया है. यदि अधिसूचित क्षेत्र के 75 प्रतिशत हिस्से में बुवाई नहीं हो पाती है, तो धान की फसल के लिए बीमित राशि के अधिकतम 25 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति का प्रावधान है. वहीं फसल कटाई प्रयोग के आधार पर वास्तविक और मानक उपज की तुलना कर बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा राशि का निर्धारण किया जायेगा.
किसानों से अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से समय सीमा के भीतर फसल बीमा कराने की अपील की है, ताकि प्राकृतिक आपदा, प्रतिकूल मौसम या अन्य कारणों से फसल क्षति होने पर उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके. योजना का उद्देश्य किसानों को जोखिम से बचाते हुए कृषि उत्पादन को सुरक्षित बनाना है.
