झारखंड में कोयला खनन के बाद बंद और गैर-परिचालन खदानों 11,184.7 हेक्टेयर भूमि हजारों हेक्टेयर भूमि अब विकास की नयी संभावनाओं का प्लॉट बन सकती है. इस बाबत खान एवं खान एवं भूतत्व विभाग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि खनन क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार इन जमीनों पर वैकल्पिक आर्थिक गतिविधियां भी विकसित की जा सकती हैं.
इससे खनन के बाद खाली पड़ी भूमि का पुन: उपयोग संभव होगा और क्षेत्रों में विकास की नयी संभावनाएं बनेंगी. इस भूमि के उपयोग में पर्यटन केंद्र और जल संरक्षण संरचनाओं को भी शामिल किया गया है.
झारखंड की कार्यशील भूमि के 16.80 प्रतिशत एबंडेंट लैंड है
खान एवं भूतत्व विभाग की रिपोर्ट की मानें तो राज्य में कुल 66,536.7 हेक्टेयर खनन भूमि दर्ज है. इसमें 50,852 हेक्टेयर भूमि पर फिलहाल खनन कार्य जारी है, जबकि 11,184.7 हेक्टेयर भूमि बंद या गैर-परिचालन खदानों (एबंडेंट) के रूप में उपलब्ध है. इसके अलावा 4,500 हेक्टेयर भूमि आगामी कोयला परियोजनाओं के लिए आवंटित है.
कुल एबंडेंट लैड का 23.65 प्रतिशत धनबाद में
जिलावार आंकड़ों में रामगढ़ सबसे ऊपर है. यहां 4,313.5 हेक्टेयर बंद एवं गैर-परिचालन खदान भूमि दर्ज है. यानी कुल एबंडेंट लैंड का 38.56 प्रतिशत भाग रामगढ़ में है. इसके बाद धनबाद में 2,645.1 हेक्टेयर यानी कुल एबंडेंट लैंड का 23.65 प्रतिशत और चतरा में 2,135.3 हेक्टेयर भूमि बंद खदानों के रूप में दर्ज है. बोकारो में 1,759.1 हेक्टेयर, गिरिडीह में 134.1 हेक्टेयर और लातेहार में 92.8 हेक्टेयर बंद खदान भूमि दर्ज की गई है.
कुल 50,852 हेक्टेयर पर जारी है उत्पादन
रिपोर्ट के अनुसार राज्य की 50,852 हेक्टेयर खनन भूमि पर वर्तमान में कोयला उत्पादन जारी है. इनमें धनबाद में चालू खदानों का क्षेत्रफल 18,615.8 हेक्टेयर है, जो झारखंड में सबसे अधिक है. इसके बाद रामगढ़ में 6,935.8 हेक्टेयर और बोकारो में 4,665.9 हेक्टेयर भूमि पर खनन गतिविधियां चल रही हैं.
मांडू, धनबाद और बाघमारा महत्वपूर्ण खनन ब्लॉक के रूप में चिह्नित
खान एवं भूतत्व विभाग की रिपोर्ट में रामगढ़ का मांडू, धनबाद, बाघमारा, बेरमो, चतरा का टंडवा तथा हजारीबाग के बड़कागांव और केरेडारी को राज्य के महत्वपूर्ण खनन ब्लॉक के रूप में चिह्नित किया गया है. इन क्षेत्रों में परिचालन के साथ-साथ बंद खदानों की भी बड़ी हिस्सेदारी है.
सोलर पार्क से लेकर लॉजिस्टिक्स हब तक की संभावना
रिपोर्ट में बंद एवं गैर-परिचालन खदानों की भूमि को वैकल्पिक आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने की संभावना बतायी गयी है. करीब 11,185 हेक्टेयर भूमि पर सोलर पार्क, हरित ऊर्जा परियोजनाएं, औद्योगिक पार्क, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जा सकते हैं. इससे लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी खनन भूमि को नए आर्थिक उपयोग में लाने का रास्ता खुल सकता है. पर्यटन और जल संरक्षण की योजनाएं भी संभव हैं.
देवघर, गोड्डा, पाकुड़, पलामू और रांची में बंद खदान का रिकॉर्ड नहीं
रिपोर्ट के अनुसार देवघर, गोड्डा, पाकुड़, पलामू और रांची जिलों में बंद खदान भूमि का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है. राज्य के कुल खनन भूमि आंकड़ों में 50,852 हेक्टेयर चालू खदान, 11,184.7 हेक्टेयर बंद या गैर-परिचालन खदान और 4,500 हेक्टेयर आगामी परियोजनाओं के लिए आवंटित भूमि शामिल है. इस तरह कुल खनन भूमि 66,536.7 हेक्टेयर दर्ज की गयी है.
