डिजिटल दौर में जहां मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. वहीं ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण की चुनौती भी गंभीर होती जा रही है. धनबाद नगर निगम ने करीब तीन साल पहले शहर में ई-वेस्ट कलेक्शन, री-साइक्लिंग और री-यूज की महत्वाकांक्षी योजना बनायी थी, लेकिन यह योजना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी.
क्या थी योजना
योजना के तहत ई वेस्ट को री-साइकिल कर उसका दुबारा इस्तेमाल करना है. इसके लिए शहर में तीन जगहों पर ई वेस्ट कलेक्शन सेंटर बनाये गये हैं. डोर-टू-डोर ई-वेस्ट कलेक्शन के लिए अलग से एक टीम काम करेगी. एकत्रित कचरे को ई-कलेक्शन सेंटर में वैज्ञानिक तरीके से री-साइकिल कर उपकरणों के माध्यम से दुबारा इस्तेमाल के लिए प्रोडक्ट तैयार करना है.
कहां बने ई वेस्ट कलेक्शन सेंटर ?
नगर निगम ने बरटांड़, धनसार और बनियाहीर क्षेत्र में ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर बनाये हैं. 2022 में ही ई कलेक्शन सेंटर बनकर तैयार हो चुके हैं, पर आज तक इसका ताला नहीं खुला है. अब तो यहां रखे उपकरणों पर जंग लगना भी शुरू हो गया है.डोर-टू-डोर कलेक्शन नहीं, बढ़ रहा खतरा
डोर-टू-डोर ई वेस्ट कलेक्शन व्यवस्था लागू नहीं होने से लोग पुराने मोबाइल, बैटरी, कंप्यूटर पार्ट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान सामान्य कचरे के साथ फेंक रहे हैं. जहरीले धातु (सीसा, पारा, कैडमियम) मिट्टी और पानी में घुल रहे हैं. ई वेस्ट के जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है. इससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा है.उप नगर आयुक्त प्रकाश कुमार से सवाल-जवाब
सवाल : तीन साल बाद भी योजना जमीन पर क्यों नहीं उतरी?जवाब : टेंडर प्रक्रिया और एजेंसी चयन में विलंब हुआ है, जल्द प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू होगा.
सवाल : डोर-टू-डोर कलेक्शन कब से शुरू होगा ?जवाब: पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे कुछ वार्डों में शुरू करने की तैयारी है.
सवाल: लोगों को जागरूक करने के लिए क्या कदम उठाये गये हैं?जवाब: स्कूलों और वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की योजना हैसवाल : ई वेस्ट को री-साइकिल कर क्या प्रोडक्ट बनाने की योजना हैजवाब : जिस तरह का ई-वेस्ट कलेक्शन होगा, उसके अनुरूप प्रोडक्ट तैयार किये जायेंगे. पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी.
एक्सपर्ट व्यू
ई-वेस्ट की री-साइकिलिंग आज बड़ी जरूरत बन चुकी है, क्योंकि तकनीक के तेजी से बदलाव के कारण मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल्द ही बेकार हो रहे हैं और ई-वेस्ट की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है. ई-वेस्ट में सीसा, पारा, कैडमियम जैसे जहरीले तत्व होते हैं, जो खुले में फेंके जाने पर मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित करते हैं. इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है. गलत तरीके से ई-वेस्ट निपटाने से मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है. सांस की बीमारी, त्वचा रोग और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ई-वेस्ट की री-साइकिलिंग से इन खतरनाक तत्वों को सुरक्षित तरीके से अलग किया जा सकता है. वहीं इसमें मौजूद तांबा, सोना, चांदी और एल्यूमिनियम जैसी कीमती धातुओं को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है. री-साइक्लिंग में नयी धातु निकालने की तुलना में कम ऊर्जा लगती है, जिससे लागत और कार्बन उत्सर्जन दोनों कम होते हैं. रोजगार के नये अवसर भी पैदा होते हैं और यह स्वच्छ पर्यावरण व सतत विकास की दिशा में एक जरूरी कदम है.
– डॉ एसके सिन्हा, पूर्व विभागाध्यक्ष इंवायरमेंट साइंस, बीबीएमकेयू