धनबाद. शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) में सर्पदंश के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) का स्टॉक तेजी से घट रहा है. गुरुवार को करीब 11.30 बजे तक अस्पताल में एएसवी के 140 वायल ही उपलब्ध थे. अस्पताल में पहुंचने वाले सर्पदंश के मरीजों को औसतन 10 वायल एएसवी की जरूरत पड़ने के आधार पर देखें, तो मौजूदा स्टॉक करीब 14 मरीजों के उपचार के बराबर है. वहीं, अस्पताल में रोजाना औसतन 8 से 10 सर्पदंश पीड़ित पहुंच रहे हैं. इस खपत के हिसाब से वर्तमान स्टॉक करीब दो दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है.
स्टॉक कम होने की स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने एएसवी की नयी खेप के लिए ऑर्डर दिया है. अब प्रबंधन की नजर इसकी आपूर्ति पर है, ताकि सर्पदंश के मरीजों के इलाज में दवा की कमी की स्थिति उत्पन्न न हो.
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कुछ दिन पहले 263 वायल था स्टॉक
अस्पताल में कुछ दिन पहले एएसवी के कुल 263 वायल उपलब्ध थे. दवा को मेल मेडिसिन वार्ड, सीसीयू, कैथलैब और फीमेल मेडिसिन वार्ड में रखा गया था. इसके बाद लगातार सर्पदंश के मरीजों को एएसवी देने के कारण स्टॉक में तेजी से कमी आयी.
रोज 8-10 मरीज पहुंच रहे अस्पताल
अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 8 से 10 सर्पदंश पीड़ित इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. मरीज की स्थिति के अनुसार एएसवी की जरूरत अलग-अलग हो सकती है. हालांकि, अस्पताल के उपलब्ध आंकड़े के अनुसार एक मरीज को औसतन करीब 10 वायल एएसवी की जरूरत पड़ रही है. ऐसे में अस्पताल में रोज आने वाले मरीजों की संख्या के मुकाबले मौजूदा स्टॉक सीमित है.
बारिश के मौसम में सर्पदंश के मरीजों की संख्या बढ़ने से एएसवी की खपत भी बढ़ी है. ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए एसएनएमएमसीएच पहुंच रहे हैं. गंभीर स्थिति वाले मरीजों को उनकी चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार एएसवी की अधिक मात्रा भी देनी पड़ सकती है.
नयी खेप की आपूर्ति का इंतजार
अस्पताल प्रबंधन ने एएसवी की नयी खेप के लिए ऑर्डर दे दिया है. ऐसे में अब उपलब्ध 140 वायल और नयी आपूर्ति के बीच का समय महत्वपूर्ण है. प्रबंधन के सामने मरीजों के इलाज के लिए मौजूदा स्टॉक का प्रबंधन करने के साथ नयी खेप की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की चुनौती है.
लगातार सर्पदंश के मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल में एएसवी की नियमित उपलब्धता जरूरी है. प्रबंधन के अनुसार नये स्टॉक के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
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