धनबाद. राजकीय पुस्तकालय को नेशनल मिशन ऑन लाइब्रेरीज (एनएमएल) के तहत मॉडल लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल तेज हो गयी है. झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसके लिए 2 करोड़ 23 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है. अब विभाग ने योजना के तहत की गयी कार्रवाई और राशि के उपयोग की स्थिति की जानकारी मांगी है. इसके लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीइओ) से एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) और उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) उपलब्ध कराने को कहा गया है.
निदेशक ने मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
विभाग के निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) राजेश प्रसाद ने डीइओ को पत्र भेजकर स्वीकृत योजना के तहत अब तक हुई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है. रिपोर्ट में योजना की वित्तीय और भौतिक प्रगति की जानकारी देने को कहा गया है. साथ ही स्वीकृत राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
विभाग की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कार्यों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है. एटीआर के माध्यम से यह जानकारी ली जायेगी कि स्वीकृत योजना के तहत अब तक क्या कदम उठाये गये हैं और कार्य किस स्तर तक पहुंचा है.
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा पुस्तकालय
मॉडल लाइब्रेरी के रूप में विकसित होने के बाद राजकीय पुस्तकालय में पाठकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने की योजना है. इसके तहत पुस्तकालय के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के साथ आधुनिक तकनीक और पठन-पाठन से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा सकता है.
योजना में दिव्यांगजनों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास, ई-जर्नल और ई-बुक की सदस्यता, बेहतर नेटवर्क कनेक्टिविटी तथा नयी और उपयोगी पठन सामग्री उपलब्ध कराने जैसे कार्य शामिल किये जा सकते हैं. इससे पुस्तकालय में पारंपरिक पुस्तकों के साथ डिजिटल संसाधनों तक पाठकों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
पाठकों को जोड़ने के लिए आउटरीच कार्यक्रम
मॉडल लाइब्रेरी की सुविधाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना है. इसके माध्यम से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं और अन्य पाठकों को पुस्तकालय की उपलब्ध सुविधाओं से जोड़ा जा सकता है.
राजकीय पुस्तकालय को आधुनिक संसाधनों से लैस करने की योजना पूरी होने पर धनबाद में बेहतर पठन केंद्र के रूप में इसकी उपयोगिता बढ़ने की उम्मीद है. फिलहाल विभाग द्वारा मांगी गयी एटीआर और उपयोगिता प्रमाण-पत्र से योजना के तहत हुई प्रगति की स्थिति सामने आयेगी.
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