छाताबाद में बार-बार भू-धंसान पर प्रशासन सख्त, खतरा टलने तक खनन और ब्लास्टिंग पर रोक

कतरास थाना क्षेत्र में बार-बार हो रहे भू-धंसान से प्रशासन अलर्ट मोड पर है. जिला उपायुक्त ने खान सुरक्षा महानिदेशालय को तत्काल निरीक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन का आदेश दिया है. क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किए जाने तक खनन और ब्लास्टिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

कतरास थाना क्षेत्र स्थित बीसीसीएल की न्यू आकाश किनारी सलानपुर खदान के समीप छाताबाद फुटबॉल मैदान के पास बार-बार हो रहे भू-धंसान को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार के अध्यक्ष सह उपायुक्त आदित्य रंजन ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) को सख्त आदेश जारी कर प्रभावित क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और खतरे का आकलन कराने को कहा है. क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किये जाने तक वहां किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि और ब्लास्टिंग पर रोक रहेगी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा होने पर इसकी पूरी जवाबदेही डीजीएमएस और संबंधित संस्थानों की होगी.

20-22 फीट तक धंसी जमीन, 15-20 मकान प्रभावित

प्रशासन के पत्र के अनुसार सात अगस्त को दोपहर करीब तीन बजे छाताबाद फुटबॉल मैदान के समीप दोबारा भू-धंसान हुआ. इस दौरान जमीन करीब 20-22 फीट तक धंस गयी और आसपास के 15-20 मकान पूर्ण या आंशिक रूप से प्रभावित हुए. प्रशासन को आशंका है कि दोबारा भू-धंसान होने पर बड़ी दुर्घटना हो सकती है.

एक महीने में दूसरी बार धंसी जमीन

इसी क्षेत्र में सात जुलाई 2026 को भी भू-धंसान की घटना हुई थी. करीब एक महीने के भीतर दूसरी बार जमीन धंसने से स्थानीय लोगों के साथ प्रशासन की चिंता बढ़ गयी है. एसएसपी की रिपोर्ट में भी सात अगस्त की घटना के बाद लोगों में आक्रोश और भविष्य में दोबारा भू-धंसान की आशंका का उल्लेख किया गया है.

400 मीटर दूर बीसीसीएल खदान, 800 मीटर पर आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट

कतरास थाना प्रभारी की रिपोर्ट के अनुसार छाताबाद फुटबॉल मैदान से उत्तर दिशा में करीब 400 मीटर की दूरी पर बीसीसीएल की न्यू आकाश किनारी सलानपुर खदान है. वहीं दक्षिण-पश्चिम दिशा में करीब 800 मीटर की दूरी पर एसटीजी डेको जेबी यानी जीटीएस आउटसोर्सिंग कंपनी की खदान स्थित है.

रिपोर्ट के मुताबिक सात अगस्त को दोपहर करीब दो से 2:30 बजे के बीच न्यू आकाश किनारी सलानपुर खदान में कोयला निकालने के लिए हैवी ब्लास्टिंग की गयी थी. ब्लास्टिंग के दौरान आसपास के घरों में तेज कंपन महसूस हुआ. इसके बाद तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी.

भूमिगत खदान के खोखले हिस्से को लेकर उठे सवाल

पुलिस रिपोर्ट में बताया गया है कि क्षेत्र में पहले बीसीसीएल की भूमिगत खदान संचालित थी. कोयला निकालने के बाद जमीन के नीचे बड़ा खोखला हिस्सा रह गया. रिपोर्ट के अनुसार खनन के बाद इस हिस्से को परित्यक्त छोड़ दिया गया और सुरक्षा मानकों के अनुरूप बालू की भराई तथा अन्य सुरक्षात्मक उपाय नहीं किये गये.

हालांकि, भू-धंसान के वास्तविक कारण का पता वैज्ञानिक जांच के बाद ही चलेगा. प्रशासन ने भूमिगत खनन के प्रभाव, जमीन की स्थिति और भविष्य के खतरे का वैज्ञानिक आकलन कराने का निर्देश दिया है.

खुले मुहानों की भराई और सर्वे का काम शुरू

भू-धंसान के बाद घटनास्थल पर बचाव और सर्वे का काम शुरू किया गया. शुरुआती दौर में ग्रामीणों के विरोध के कारण रेस्क्यू टीम को लौटना पड़ा, जिसके बाद सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ी. बंद परियोजना के खुले मुहानों की भराई का काम भी शुरू किया गया. गोविंदपुर क्षेत्रीय प्रबंधन ने डोजर और जेसीबी की मदद से आसपास के खुले मुहानों को भरने की कार्रवाई की. घटनास्थल के आसपास भूमिगत कोयला खनन की सीमा का भी आकलन किया गया. जमींदोज हुए मकानों में से दो के मलबे को हटाया गया.

प्रभावित परिवारों ने मांगा सुरक्षित पुनर्वास

घटना के बाद स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवार कल्याण एवं आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने घटनास्थल का दौरा किया. प्रशासन के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने स्थिति को खतरनाक बताया और भविष्य में अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया.

प्रभावित परिवारों ने सुरक्षित पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार की मांग उठायी है. स्थानीय स्तर पर आशियाना बचाओ आंदोलन के तहत धरना भी दिया गया. प्रशासन के सामने प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास का मुद्दा प्रमुखता से रखा गया है.

खान सुरक्षा नियमों के पालन का निर्देश

डीजीएमएस को भेजे पत्र में खान अधिनियम, 1952, कोयला खान विनियमन, 2017 और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा मापदंडों व मानक संचालन प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है. प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्र में परित्यक्त खदानों की समुचित भराई नहीं होने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बीच हैवी ब्लास्टिंग किये जाने को गंभीर मामला बताया है.

प्रशासन का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक वैज्ञानिक जांच के बाद क्षेत्र को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक वहां खनन और ब्लास्टिंग नहीं की जायेगी.


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By Shobhit ranjan

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