धनबाद.
कोयला नगर स्थित सामुदायिक भवन में मातृ संघ जनकल्याण सेवा आश्रम और रिश्ते द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय द्विभाषीय नृत्य और संगीत महोत्सव हुनर की खोज का रविवार को समापन हो गया. कार्यक्रम के अंतिम दिन देश भर से आये लगभग 50 प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया. दुर्गापुर से गुरु सोमनाथ पांडा के नेतृत्व में आयीं नृत्यांगना ने स्नेहा ने ओड़िसी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इसके साथ ही गुरु अंकिता, रमा, बर्नाली और सुस्मिता के विद्यार्थियों ने भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से समां बांधा. निर्णायक मंडली में कोलकाता से आईं प्रतिष्ठित नृत्यांगना चित्रा बसाक, सुदीपा साइन (सील) और संगीत विशेषज्ञ अजीत कुमार चौधरी शामिल थे. समाज सेवी डॉ महापात्र की सहधर्मिणी व रेखा मंडल की उपस्थिति में प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया. चित्रा बसाक, सुदीपा सेन, बर्नाली पॉल, ख्याति ने की नृत्य प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया. सोमेश व कुंदन ने अपने सुर से समा बांधा. कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया. मंच संचालन सुपर्णा बनर्जी, अंकिता भौमिक व संपा पटनायक ने किया. मौके पर सुप्रिय मजूमदार, स्वामी अच्युतानंद, गौतम आचार्य, मृत्युंजय ओझा, वंदना घोषाल, अनूप दत्त, आरती रानी मंडल, संचिता बक्शी, रीना मंडल, अभिषेक आचार्य, विजय सेन, गौरव, करुणामय मुखर्जी आदि उपस्थित थे.यह भी पढ़ें
नृत्यांगनाओं को मिली कथक के घरानों की जानकारी
धनबाद.
मानस मंदिर में स्वधा आर्ट सेंटर की ओर से आयोजित पांच दिवसीय शास्त्रीय नृत्य प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रशिक्षणार्थियों को कथक के चक्कर के अलग अलग प्रकार, अलग अलग घराने, खासियत की जानकारी दूरदर्शन के कलाकार सह राष्ट्रीय नृत्य भूषण पुरस्कार विजेता वैशाली राठौर ने दी. उन्होंने बताया कि कथक नृत्य के दो प्रमुख घराने हैं. दोनों घरानों का नाम उत्तर भारत के शहरों के नाम पर लखनऊ व जयपुर घराना है. वर्तमान समय का कथक सीधे पैरों से किया जाता है और पैरों में पहने हुए घुंघरुओं को नियंत्रित किया जाता है. लगभग बीस प्रशिक्षणार्थी कथक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. 19 जून को शास्त्रीय नृत्यशाला का समापन होगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
