कोल इंडिया ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अधिकारियों के प्रदर्शन आधारित भुगतान (पीआरपी) की गणना के लिए ग्रेडवार किट्टी फैक्टर जारी कर दिया है. इससे कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों के अधिकारियों के पीआरपी भुगतान की प्रक्रिया के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है. कोल इंडिया के वित्त विभाग ने देय पीआरपी राशि के आधार पर किट्टी फैक्टर निर्धारित कर दिया है.
अनुषंगी इकाइयों को दी गई जानकारी
शुक्रवार को कोल इंडिया की ओर से जारी पत्र में बीसीसीएल, सीसीएल, इसीएल, एमसीएल, एनसीएल, एसइसीएल, डब्ल्यूसीएल और सीएमपीडीआइएल के मानव संसाधन निदेशकों को इसकी जानकारी दी गयी है. पत्र के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रदर्शन आधारित पारिश्रमिक की गणना इसी निर्धारित गुणक के आधार पर की जायेगी.
उच्चतम प्रबंधन के लिए सर्वाधिक गुणक
कोल इंडिया ने सीएमडी स्तर के लिए 97.50 प्रतिशत गुणक निर्धारित किया है. निदेशक स्तर के लिए यह 81.25 प्रतिशत है. अधिकारियों में इ-9 श्रेणी के लिए 58.50 प्रतिशत, इ-8 के लिए 52 प्रतिशत, इ-7 के लिए 45.50 प्रतिशत और इ-6 के लिए 39 प्रतिशत निर्धारित किया गया है.
इसी तरह इ-5 और इ-4 श्रेणी के अधिकारियों के लिए 32.50-32.50 प्रतिशत गुणक तय किया गया है. इ-3, इ-2 और इ-1 श्रेणी के लिए यह 26-26 प्रतिशत है. यानी अधिकारी की श्रेणी के अनुसार मिलने वाले प्रदर्शन आधारित पारिश्रमिक की गणना का आधार स्पष्ट हो गया है.
17 अगस्त के पत्र के बाद जारी हुई जानकारी
कोल इंडिया के 21 अगस्त के पत्र में 17 अगस्त 2026 को जारी पत्र संख्या 880 का भी उल्लेख किया गया है. उसी क्रम में वित्त विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए देय प्रदर्शन आधारित पारिश्रमिक की गणना के लिए श्रेणीवार गुणक की जानकारी दी गयी है. अब संबंधित अनुषंगी कंपनियों को इसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी.
क्या है किट्टी फैक्टर ?
सामान्यत कर्मचारी के प्रदर्शन के आधार पर ग्रेडवार मिलने वाली परिवर्ती राशि निकालने में प्रयुक्त महत्वपूर्ण गुणांक/फैक्टर है किटी फैक्टर. विभिन्न उपक्रम इसका अर्थ और गणना-पद्धति अपने हिसाब से रख सकते हैं. कोल इंडिया की पीआरपी व्यवस्था में पहले कोर बिजनेस से प्राप्त लाभ का अधिकतम पांच प्रतिशत पीआरपी के लिए उपलब्ध कराया जाता है.
इस राशि को संबंधित वर्ष के लाभ और वेतनवृद्धि लाभ के बीच 65:35 के अनुपात में बांटा जाता है. इसके बाद सभी अधिकारियों के ग्रेड, कोल इंडिया की एमओ रेटिंग रेटिंग, टीम रेटिंग और व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर संभावित पीआरपी की कुल आवश्यकता निकाली जाती है. इसी उपलब्ध राशि और कुल आवश्यकता के आधार पर किट्टी फैक्टर निर्धारित होता है. महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि किट्टी फैक्टर कभी भी सौ प्रतिशत नहीं हो सकता है.
इस्तेमाल को इसे उदाहरण से एसे समझा जा सकता है कि ग्रेड E6 के अधिकारी के लिए पीआरपी की अधिकतम सीमा मूल वेतन का 60 प्रतिशत है. यदि संबंधित वर्ष का किट्टी फैक्टर 80 प्रतिशत है तो अधिकतम 60 प्रतिशत को सीधे 60 प्रतिशत नहीं माना जाएगा, बल्कि किट्टी फैक्टर से समायोजित किया जायेगा.
