Coal India CSR Budget: कोल इंडिया का सीएसआर बजट 1,000 करोड़ के पार, 12 साल के आंकड़ों ने चौंकाया

कोल इंडिया का CSR बजट 1000 करोड़ के पार! 12 साल में 7,276 करोड़ से अधिक खर्च, 3.56 करोड़ लोगों को लाभ. जानें शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में कंपनी का योगदान.

धनबाद. कोल इंडिया लिमिटेड का कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) बजट अब सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. कंपनी के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच सीएसआर मद में निर्धारित 5,795 करोड़ रुपये की अनिवार्य राशि के मुकाबले 7,276 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं. यह निर्धारित लक्ष्य से 1,481 करोड़ रुपये अधिक है.

कंपनी का कहना है कि सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, स्वच्छता और सामुदायिक बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यक्रमों का लाभ प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब 3.56 करोड़ लोगों तक पहुंचा है. कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत सीएसआर प्रावधान लागू होने से पहले भी कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियां खनन क्षेत्रों के आसपास सामुदायिक विकास कार्य करती रही हैं. वर्तमान में सीएसआर कार्यक्रमों को स्थानीय जरूरतों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित किया जा रहा है.

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खनन प्रभावित क्षेत्रों को दी जाती है प्राथमिकता

कोल इंडिया के अनुसार उसकी सीएसआर नीति के तहत वार्षिक खर्च का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा खदानों और परियोजनाओं के 25 किलोमीटर के दायरे में खर्च किया जाता है. परियोजना प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है. कंपनी का दावा है कि कुल सीएसआर व्यय का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कोयला उत्पादक राज्यों में खर्च किया गया है, जिससे स्थानीय समुदायों को सीधे लाभ मिल सके.

शिक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर

कंपनी के आंकड़ों के अनुसार सरकारी स्कूलों में 50 हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है. वहीं डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 2,300 से अधिक स्मार्ट क्लासरूम और 500 से अधिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान-तकनीक-इंजीनियरिंग-गणित (एसटीईएम) प्रयोगशालाएं स्थापित की गयी हैं.

कंपनी का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ छात्रों को आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है.

स्वास्थ्य और कौशल विकास परियोजनाओं पर निवेश

स्वास्थ्य क्षेत्र में ओडिशा के अंगुल में 500 बेड वाले मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा झारसुगुड़ा में हृदय उपचार केंद्र के निर्माण पर कुल 596 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं. इसके अलावा थैलेसीमिया बाल सेवा और नन्हा सा दिल जैसी स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से भी लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गयी है.

कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रमों के तहत पिछले चार वित्तीय वर्षों में 48 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी सहायता उपलब्ध करायी गयी है. वहीं खनन जिलों के 1,300 से अधिक संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) अभ्यर्थियों को भी विशेष सहायता प्रदान की गयी है.

निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था

कोल इंडिया ने बताया कि सीएसआर परियोजनाओं की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए वार्षिक कार्ययोजना, समयबद्ध समझौते, चरणबद्ध राशि निर्गत करने और बड़े प्रोजेक्ट्स के तृतीय पक्ष प्रभाव मूल्यांकन की व्यवस्था लागू की गयी है. कंपनी का कहना है कि सीएसआर कार्यक्रमों को केवल व्यय तक सीमित नहीं रखकर उनके सामाजिक प्रभाव की भी नियमित समीक्षा की जाती है.

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By Manohar kumar

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