निरसा में क्यों ठप हुआ चापापुर ओसीपी का काम? ग्रामीणों और ईसीएल प्रबंधन में बढ़ा विवाद

ईसीएल मुगमा क्षेत्र के चापापुर ओसीपी में ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद के कारण काम रुक गया है. ब्लास्टिंग, प्रदूषण और रोजगार को लेकर ग्रामीणों की आपत्ति है, वहीं प्रबंधन ने कर्मचारियों से मारपीट का आरोप लगाया है.

धनबाद. ईसीएल मुगमा क्षेत्र अंतर्गत चापापुर ओसीपी में कार्य शुरू कराने को लेकर रविवार को देवियाना के ग्रामीणों और ओसीपी कर्मियों के बीच विवाद हो गया. सूचना मिलने पर निरसा पुलिस, सीआइएसएफ और ईसीएल सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया. घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाये हैं. ओसीपी और ईसीएल प्रबंधन ने कर्मचारियों के साथ मारपीट का आरोप लगाया है, जबकि ग्रामीणों ने इस आरोप से इनकार किया है.

ब्लास्टिंग, प्रदूषण और रोजगार को लेकर ग्रामीणों की आपत्ति

ग्रामीणों का कहना है कि ओसीपी में हो रही हैवी ब्लास्टिंग से आसपास के घरों में दरारें पड़ रही हैं. इस संबंध में कई बार प्रबंधन को शिकायत दी गयी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान से उड़ने वाली धूल के कारण गांव के दो तालाब प्रभावित हो रहे हैं. साथ ही ओवरबर्डन (ओबी) का बड़ा ढेर जमा होने से संभावित हादसे की आशंका भी बनी हुई है.

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग को लेकर शनिवार से ओसीपी का काम बंद कराया गया है. उनका आरोप है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा है.

प्रबंधन ने कर्मचारियों से मारपीट का लगाया आरोप

दूसरी ओर, ओसीपी और ईसीएल प्रबंधन का कहना है कि ग्रामीणों के साथ पूर्व में कई दौर की बातचीत हो चुकी थी. प्रबंधन के अनुसार, रविवार को जब ओसीपी में काम शुरू कराने का प्रयास किया गया, तब कुछ ग्रामीणों ने कर्मचारियों के साथ मारपीट की और उन्हें कार्यस्थल से हटने को मजबूर किया. प्रबंधन का दावा है कि घटना में चार कर्मी घायल हुए हैं.

हालांकि ग्रामीणों ने कर्मचारियों के साथ मारपीट के आरोपों को खारिज किया है. इस संबंध में दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

हाजिरी नहीं बनने पर कर्मचारियों का धरना

विवाद के बीच रविवार को ओसीपी कर्मियों ने भी कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया. कर्मचारियों का आरोप है कि शनिवार की रात्रि पाली में कार्य करने के बावजूद उनकी हाजिरी नहीं बनायी गयी. उनका कहना है कि प्रबंधन ने 'नो वर्क, नो पे' के आधार पर उपस्थिति दर्ज नहीं की, जबकि कार्य बाधित होने के लिए कर्मचारी जिम्मेदार नहीं थे.

कर्मचारियों ने स्थानीय मजदूरों के साथ भेदभाव का भी आरोप लगाया और कहा कि जब तक सभी कर्मियों की हाजिरी नहीं बनायी जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा.

प्रशासन की निगरानी में स्थिति

घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है. प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और संबंधित पक्षों के साथ संवाद के माध्यम से विवाद के समाधान का प्रयास किया जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By अरिंदम चक्रवर्ती

अरिंदम चक्रवर्ती बीते 11 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। वे निरसा क्षेत्र की खबरों की रिपोर्टिंग और संपादकीय समन्वय का दायित्व निभाते हैं। स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और क्षेत्रीय घटनाओं पर तथ्यपरक एवं विश्वसनीय रिपोर्टिंग उनकी प्रमुख पहचान है।

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