बेलगड़िया की अधिग्रहित जमीन सरकारी खाते में दर्ज होने के बाद भी म्यूटेशन नहीं होने से लंबे समय से लीज की प्रक्रिया अटकी हुई थी. अब जिला प्रशासन ने मामले में पहल करते हुए राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को प्रस्ताव भेजा है. इसमें बलियापुर अंचल के मौजा बेलगड़िया की 38.23 एकड़ गैर-आबाद सरकारी भूमि को झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (जेआरडीए) के नाम 99 वर्ष की लीज पर देने का अनुरोध किया गया है.
अस्पताल से शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तक विकसित होंगी सुविधाएं
प्रस्तावित जमीन पर झरिया के अग्नि प्रभावित क्षेत्रों से विस्थापित परिवारों के लिए अस्पताल, सूक्ष्म उद्योग, वस्त्र उद्योग, सामुदायिक भवन और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की योजना है. इससे पुनर्वास स्थल पर रह रहे विस्थापित परिवारों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
जिला प्रशासन ने पहले 29 एकड़ जमीन का प्रस्ताव भेजा था. बाद में इसे संशोधित कर 38.23 एकड़ कर दिया गया.
प्रभात खबर की खबर के बाद तेज हुई प्रक्रिया
बेलगड़िया की अधिग्रहित जमीन सरकारी खाते में दर्ज होने के बावजूद म्यूटेशन नहीं होने से लीज प्रक्रिया में आ रही अड़चन को लेकर प्रभात खबर ने एक, दो, तीन और आठ अप्रैल के संस्करण में लगातार खबर प्रकाशित की थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को आगे बढ़ाते हुए राजस्व विभाग को पत्र भेजकर भूमि जेआरडीए के नाम लीज पर देने का अनुरोध किया है.
दिसंबर 2028 तक मास्टर प्लान पूरा करने का लक्ष्य
उपायुक्त सह उप मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी, जेआरडीए ने विभाग को भेजे पत्र में कहा है कि संशोधित झरिया मास्टर प्लान को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. योजना का मुख्य उद्देश्य अग्नि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले सभी विस्थापित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्वासित करना है.
बेलगड़िया में प्रस्तावित जमीन पर संस्थागत, औद्योगिक और व्यावसायिक सुविधाओं के विकास से पुनर्वास योजना को गति मिलने की उम्मीद है.
