अंतिम संस्कार के लिए रास्ता नहीं मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों ने 80 वर्षीया बसंती देवी के शव को एना परियोजना के मेन गेट पर रखकर करीब चार घंटे तक शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया. ग्रामीण शव को दाह-संस्कार के लिए ले जाने के लिए तत्काल रास्ते बनाने की मांग कर रहे थे. चार घंटे विरोध के बाद बीसीसीएल प्रबंधन ने वाहन और 10 हजार रु उपलब्ध कराये, जिसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया.
मेयर ने किया हस्तक्षेप तो मिला रास्ता
घटना की जानकारी मिलने पर मेयर संजीव सिंह ने फोन पर बीसीसीएल अधिकारियों से बात कर मामले में हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए रास्ते का अभाव बेहद संवेदनशील और मानवीय मुद्दा है. खनन गतिविधियां जरूरी हैं, पर इसके कारण ग्रामीणों के मूल अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती. उन्होंने एना क्षेत्र में स्थायी रास्ते की व्यवस्था करने की मांग की.
स्थायी रास्ता नहीं बना तो होगा आंदोलन
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी बप्पी बाउरी ने संविधान के अनुच्छेद-21 के हवाले से कहा कि सभी को सम्मानजनक जीवन का अधिकार है. इसकी गारंटी संविधान देता है. ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए भी रास्ता नहीं बचना गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने चेतावनी दी कि बैकफिलिंग के बाद जमीन समतल कर स्थायी रास्ता नहीं बनाया गया, तो ग्रामीणों के समर्थन में लोकतांत्रिक आंदोलन किया जायेगा.
खनन कार्यों से आवागमन प्रभावित होने की शिकायत
ग्रामीणों का कहना था कि खनन कार्यों के कारण क्षेत्र में आवागमन के रास्ते प्रभावित हुए हैं. इससे सामान्य दिनों के साथ-साथ आपात और सामाजिक जरूरतों के समय भी परेशानी होती है. अंतिम संस्कार जैसी स्थिति में रास्ते का अभाव ग्रामीणों के लिए गंभीर संकट बन गया.
बीसीसीएल ने तत्काल की पहल
विरोध के दौरान एना परियोजना पदाधिकारी संजय सिंह और आउटसोर्सिंग कंपनी के प्रबंधक रवि अग्रवाल मौके पर मौजूद थे. प्रदर्शन में आजादी भुइंया, ननका भुइंया, शारदा देवी, मंगल भुइंया, संजय भुइंया समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे. प्रबंधन की ओर से तत्काल वाहन और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराये जाने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया.
