आर्सेनिक का खतरा अब केवल भूजल तक सीमित रहने की चिंता नहीं है. साहिबगंज जिले में आइआइटी-आइएसएम के एनवायरनमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की ओर से किये गये शोध में पानी से पशुओं और वहां से दूध तक आर्सेनिक के पहुंचने की संभावित कड़ी सामने आयी है. अध्ययन में पशुओं के पीने के पानी, चारे और दूध में आर्सेनिक की मात्रा के बीच मजबूत सांख्यिकीय संबंध पाया गया है. शोधकर्ताओं ने बच्चों में आर्सेनिक संपर्क से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिम का भी आकलन किया है, जिसमें कुछ स्थानों और आयु वर्गों में जोखिम सूचकांक निर्धारित मानक से ऊपर पाया गया.
शोध के दौरान साहिबगंज के आठ अलग-अलग स्थानों से गाय के दूध, पशुओं के पीने के पानी, चारे और मिट्टी के नमूने लिये गये. जांच में पशुओं के पीने के पानी में आर्सेनिक की औसत मात्रा 0.44 मिलीग्राम प्रति लीटर रही. दूध के नमूनों में मात्रा अलग-अलग मिली. कुछ नमूनों में आर्सेनिक जांच की पता लगाने की सीमा से नीचे था, जबकि अधिकतम मात्रा 0.026 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम दर्ज की गयी. यह शोध प्रो सुखा रंजन समद्दार के नेतृत्व में शोधार्थी रुपेश राजवार, कुमार ऋषभ और दिवाकर कुमार ने किया है. शोध हाल में अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘एनवायरनमेंटल मॉनिटरिंग एंड असेसमेंट’ में प्रकाशित हुआ है.
पानी और दूध के बीच 0.983 का मजबूत संबंध
अध्ययन का महत्वपूर्ण निष्कर्ष पशुओं के पीने के पानी और दूध में आर्सेनिक की मात्रा के बीच पाया गया 0.983 का मजबूत सांख्यिकीय संबंध है. वहीं चारे और दूध में आर्सेनिक के बीच यह संबंध 0.970 रहा. शोधकर्ताओं के अनुसार, ये आंकड़े संकेत देते हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के आर्सेनिक संपर्क में पीने का पानी और चारा महत्वपूर्ण माध्यम हो सकते हैं.
इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल पानी पीने से दूध में आर्सेनिक की मात्रा निश्चित रूप से बढ़ती है, लेकिन अध्ययन में पाया गया मजबूत संबंध संभावित फूड चेन की ओर संकेत करता है. दूषित मिट्टी में उगने वाला चारा भी पशुओं के शरीर तक आर्सेनिक पहुंचने का माध्यम बन सकता है.
छोटे बच्चों में संभावित जोखिम ने बढ़ायी चिंता
दूध बच्चों के आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण शोधकर्ताओं ने अलग-अलग आयु वर्गों के लिए आर्सेनिक संपर्क से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिम का आकलन किया. अध्ययन में एक स्थान पर 0 से 3 वर्ष और 3 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए गैर-कैंसरकारी खतरा सूचकांक एक से अधिक पाया गया.
मोंटे कार्लो सिमुलेशन के 95वें प्रतिशतक परिणामों में 0 से 3 वर्ष के बच्चों के लिए तीन स्थानों पर खतरा सूचकांक एक से अधिक रहा. अध्ययन में इस्तेमाल जोखिम-आकलन पद्धति के अनुसार एक से अधिक खतरा सूचकांक संभावित स्वास्थ्य चिंता का संकेत देता है. हालांकि, यह किसी बच्चे में बीमारी होने का चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है.
कैंसर जोखिम का भी किया गया आकलन
शोध में आर्सेनिक से जुड़े संभावित कैंसर जोखिम का भी आकलन किया गया. एक स्थान पर 0 से 3 वर्ष के बच्चों के लिए कैंसर जोखिम 8.69×10⁻⁴ तक दर्ज किया गया. मोंटे कार्लो सिमुलेशन के 95वें प्रतिशतक पर इसी आयु वर्ग के लिए यह अनुमानित जोखिम 1.15×10⁻³ रहा.
शोधकर्ताओं के अनुसार, ये आंकड़े किसी बच्चे में कैंसर होने का प्रमाण नहीं हैं. ये जोखिम-आकलन मॉडल से निकले संभावित जोखिम को दर्शाते हैं. इसलिए इन आंकड़ों को स्वास्थ्य निगरानी और जोखिम कम करने के लिए संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए.
सिर्फ पानी नहीं, चारा-मिट्टी और दूध की भी निगरानी जरूरी
शोध में आर्सेनिक के संभावित स्रोतों की पहचान के लिए बहु-आयामी सांख्यिकीय विश्लेषण किया गया. इसमें पानी, चारा और मिट्टी प्रमुख कारकों के रूप में सामने आये. शोध के निष्कर्षों के आधार पर आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में केवल मानव पेयजल की जांच को पर्याप्त नहीं माना जा सकता. पशुओं के पीने के पानी, चारे, मिट्टी और दूध की भी नियमित निगरानी जरूरी हो सकती है.
शोध में यह भी बताया गया है कि दूध में आर्सेनिक प्रोटीन के घटकों केसीन और व्हे तथा वसा के साथ जुड़ सकता है. इसलिए घरेलू स्तर पर केवल दूध उबालने को आर्सेनिक हटाने का भरोसेमंद उपाय नहीं माना जा सकता. ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षित जल स्रोत उपलब्ध कराना और खाद्य श्रृंखला के विभिन्न स्तरों पर नियमित जांच करना संभावित जोखिम को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
