IIT-ISM में समर्थ्य-2026: 2030 की वर्कफोर्स पर मंथन, AI के साथ इंसानी हुनर और लीडरशिप पर जोर

IIT ISM में आयोजित 'समर्थ्य-2026' HR कॉन्क्लेव ने 2030 की वर्कफोर्स के लिए महत्वपूर्ण चर्चाएं कीं. इसमें AI के साथ मानव कौशल का संतुलन, कर्मचारी कल्याण और नई पीढ़ी की लीडरशिप पर जोर दिया गया.

धनबाद. आइआइटी आइएसएम के मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से समर्थ्य-2026 एचआर कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया. ‘फ्यूचर वर्कफोर्स 2030, बिल्डिंग एजाइल टैलेंट फॉर एन एआई-पावर्ड एंड सस्टेनेबल वर्ल्ड’ थीम पर आयोजित कॉन्क्लेव में देश की विभिन्न कंपनियों के वरिष्ठ एचआर प्रोफेशनल्स, इंडस्ट्री लीडर्स, फैकल्टी सदस्य और विद्यार्थी शामिल हुए. कार्यक्रम में तकनीक और उद्योग में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच भविष्य के कार्यबल की जरूरतों, मानव-एआई सहयोग, कर्मचारी कल्याण और नई पीढ़ी के नेतृत्व विकास पर चर्चा हुई.

उच्च दबाव वाले काम में कर्मचारी कल्याण पर जोर

आइआइटी आइएसएम के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा और विभागाध्यक्ष प्रो. संदीप मंडल के मार्गदर्शन में आयोजित कॉन्क्लेव में तीन पैनल डिस्कशन हुए. पहले पैनल का विषय ‘माइनिंग द ह्यूमन इक्वेशन, वर्क, वेल-बीइंग एंड सस्टेनेबल परफॉर्मेंस इन हाई-स्टेक्स एनवायरनमेंट्स’ था.

इसमें टाइगर एनालिटिक्स के प्रियाकमेश कामत्ची, एइक्वस लिमिटेड के सीएचआरओ कपिल महाजन, कोडिंगल के को-फाउंडर एवं सीओओ सत्यम बरनवाल और ईवाई के सीनियर कंसल्टेंट अब्दुल गनी ने विचार रखे. विशेषज्ञों ने कहा कि उच्च दबाव वाले कार्यस्थलों में लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन के लिए कर्मचारी कल्याण, सहयोगी माहौल और संतुलित कार्य संस्कृति महत्वपूर्ण है.

एआइ मानव क्षमता बढ़ाने का साधन

दूसरे पैनल ‘रीडिफाइनिंग वर्क: अनलॉकिंग इनोवेशन थ्रू ह्यूमन-एआई कोलैबोरेशन’ में ब्रिजस्टोन के विद्या सागर वेदनाभटला, पाइन लैब्स की डायरेक्टर आकृति शर्मा, प्रोटिविटी के एसोसिएट डायरेक्टर संतोष कुमार पाढ़ी और आइआइटी आइएसएम की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रो. अपर्णा कृष्णा शामिल हुईं.

विशेषज्ञों ने एआइ को रोजगार के विकल्प के बजाय मानव क्षमता बढ़ाने वाले साधन के रूप में देखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भविष्य के कार्यस्थल में तकनीकी दक्षता के साथ रचनात्मक सोच, निर्णय लेने की क्षमता और मानवीय कौशल भी महत्वपूर्ण रहेंगे. एआइ और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कर्मचारियों के लिए नयी तकनीक सीखने और उसे कार्यक्षेत्र के अनुरूप इस्तेमाल करने की क्षमता जरूरी होगी.

जेन-जी और मिलेनियल्स के लिए नई नेतृत्व क्षमता

तीसरे पैनल का विषय ‘फ्यूचर-रेडी लीडरशिप: प्रिपेयरिंग जेन-जी एंड मिलेनियल टैलेंट फॉर 2030’ था. इसमें सेंट्रिएंट फार्मास्यूटिकल्स के देवेश पी. श्रीवास्तव, जायडस के नितेश राज जायसवाल, इंफोसिस के शॉन शौर्य फ्रांसिस, ईवाई के सुव्रोजित सोम और आइआइटी आइएसएम की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सविता दत्ता ने विचार रखे.

चर्चा में नई पीढ़ी की बदलती अपेक्षाओं, नेतृत्व विकास, निरंतर सीखने और बदलते कार्य वातावरण के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता पर जोर दिया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि 2030 की वर्कफोर्स के लिए कर्मचारियों में तकनीकी ज्ञान के साथ एडेप्टेबिलिटी, रचनात्मकता और मानवीय क्षमताओं का विकास जरूरी होगा.

इंडस्ट्री और एकेडमिक जगत के बीच संवाद

कॉन्क्लेव में आदित्य बिड़ला कैपिटल समेत विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को इंडस्ट्री विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला. विशेषज्ञों ने भविष्य के रोजगार बाजार में लगातार सीखने और बदलती तकनीक के अनुरूप कौशल विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया.

समर्थ्य-2026 के माध्यम से उद्योग और अकादमिक जगत के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी पहल की गयी. कॉन्क्लेव में हुई चर्चाओं का केंद्र यही रहा कि तकनीक आधारित भविष्य के कार्यस्थल में मानव कौशल और एआइ का संतुलित उपयोग ही अधिक प्रभावी और टिकाऊ कार्यसंस्कृति का आधार बनेगा.

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By Sudhir Sinha

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