धनबाद के NH पर मौत का सफर! 4 महीने में 91 लोगों की गई जान, राजगंज-गोविंदपुर सबसे खतरनाक

धनबाद के एनएच पर सड़क हादसों का कहर, चार महीने में 91 लोगों की मौत. बंद स्ट्रीट लाइट और ब्लैक स्पॉट बने बड़ी वजह, दोपहिया सवार सबसे असुरक्षित.

धनबाद जिले से गुजरने वाले एनएच पर सड़क सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में 91 लोगों की मौत और 30 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. मृतकों में 30 दोपहिया सवार और 29 पैदल यात्री हैं.

यानी कुल मौतों में करीब 65 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं दो वर्गों का है. जिला सड़क सुरक्षा समिति की हालिया बैठक की रिपोर्ट में सामने आये आंकड़े हाइवे पर बढ़ते खतरे का इशारा करते हैं.

तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग ने बढ़ाई चिंता

सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं. रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से पैदल यात्रियों और दोपहिया सवारों के लिए खतरा और बढ़ जाता है.

सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त कार (फाइल फोटो)

राजगंज से गोविंदपुर तक ज्यादा खतरा

एनएच पर राजगंज से गोविंदपुर के बीच दुर्घटनाएं अधिक हो रही हैं. जिले में 15 दुर्घटना संभावित स्थल (ब्लैक स्पॉट) चिह्नित किये गये हैं. इनमें सड़क डिजाइन की खामियां, अनियोजित कट, संकेतकों की कमी, खराब रोशनी, क्षतिग्रस्त डिवाइडर और भारी वाहनों की आवाजाही हादसों का जोखिम बढ़ा रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार एनएच के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइट लंबे समय से बंद हैं, जिससे रात में दृश्यता कम हो जाती है.

मार्च-अप्रैल में बढ़े दोपहिया हादसे

जनवरी और फरवरी में सड़क हादसों में 52 लोगों की मौत और 14 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. इस दौरान 16 पैदल यात्रियों और 13 दोपहिया सवारों की जान गयी. इसके अलावा ट्रक-लॉरी हादसों में छह, कार-जीप-टैक्सी में चार और साइकिल दुर्घटनाओं में चार मौतें दर्ज हुईं.

रेलवे गेस्ट हाउस के पास क्षतिग्रस्त कार (फाइल फोटो)

मार्च और अप्रैल में 39 लोगों की मौत

मार्च और अप्रैल में 39 लोगों की मौत और 16 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. इस अवधि में दोपहिया सवार सबसे ज्यादा प्रभावित रहे. 17 दोपहिया सवार और 13 पैदल यात्री हादसों में मारे गये. कार, जीप, वैन और टैक्सी से जुड़ी दुर्घटनाओं में पांच, ट्रक-लॉरी में एक, ऑटो रिक्शा में एक तथा अन्य वाहनों से संबंधित हादसों में दो लोगों की मौत हुई.

दोपहिया और पैदल यात्री सबसे ज्यादा असुरक्षित

चार माह के आंकड़ों के अनुसार दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में 30 मौत और 14 गंभीर घायल हुए. पैदल यात्रियों में 29 मौत तथा नौ गंभीर घायल दर्ज किये गये. कार, जीप, वैन व टैक्सी दुर्घटनाओं में नौ मौत और तीन गंभीर घायल हुए.

सांकेतिक फोटो

ट्रक-लॉरी हादसों में सात, साइकिल दुर्घटनाओं में चार और ऑटो रिक्शा हादसे में एक मौत हुई. अन्य श्रेणी के वाहनों से जुड़े हादसों में तीन लोगों की जान गयी.

बंद स्ट्रीट लाइट और गलत कट बढ़ा रहे खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार हाइवे पर पर्याप्त रोशनी का अभाव, ओवरस्पीड, हेलमेट व सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना, शराब पीकर वाहन चलाना और गलत दिशा में वाहन चलाना हादसों के प्रमुख कारण हैं. कई स्थानों पर अवैध कट, अतिक्रमण और क्षतिग्रस्त डिवाइडर भी खतरा बढ़ा रहे हैं. पैदल पार पथ और सर्विस लेन की कमी के कारण भी पैदल यात्रियों को हाईवे पार करना पड़ता है.

स्थायी सुधार के साथ सख्त निगरानी जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक बंद स्ट्रीट लाइटों की तत्काल मरम्मत के साथ ब्लैक स्पॉट का स्थायी इंजीनियरिंग सुधार जरूरी है. स्पीड कैमरे, सीसीटीवी, रंबल स्ट्रिप, रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड, सुरक्षित यू-टर्न, फुटओवर ब्रिज और जेब्रा क्रॉसिंग विकसित करने की जरूरत है.

हेलमेट व सीट बेल्ट जांच, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई और नियमित सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं. प्रशासन, एनएचएआई, पुलिस और स्थानीय निकायों के समन्वित प्रयास से ही हादसों में प्रभावी कमी लाई जा सकती है.


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By Shobhit ranjan

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