धनबाद/भूली : भूली ओपी प्रभारी अरविंद कुमार पर लगे दुष्कर्म के आरोप में 48 घंटे बाद नया मोड़ आ गया है. नाबालिग लड़की अपने आवेदन में लगाये गये आरोप से पलट गयी है. उसने गुरुवार को एसएसपी को एक आवेदन दिया है, जिसमें कहा है गया है : दो मई को दिये आवेदन में मैंने भूली ओपी प्रभारी अरविंद कुमार पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था जो सरासर गलत है.
मैंने किसी दूसरे के कहने और बहकावे में आकर यह बात बोली थी. मेरे द्वारा दिये गये आवेदन पर कोई कार्रवाई न की जाय. मुझे बहुत शर्म आ रही है, जिसकी सूचना मैं लिखित रूप से दे रही हूं. इसके लिए किसी के द्वारा कोई दबाव नहीं दिया गया है. मैं स्वेच्छा से अपने माता-पिता के समक्ष अपना हस्ताक्षर बनाकर आवेदन दे रही हूं. मेरे पिता व चाचा पर कोई कानूनी कार्रवाई न की जाये. आवेदन पर नाबलिग के माता-पिता का भी हस्ताक्षर है. आवेदन की प्रति सिटी एसपी व डीएसपी (लॉ एंड आर्डर) को भी दी गयी है.
डीएसपी के समक्ष दर्ज कराया बयान : नाबालिग लड़की नेअपने माता-पिता के साथ गुरुवार को डीएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) डीएन बंका के ऑफिस पहुंच अपना बयान दर्ज कराया. पुलिस ने बयान की वीडियोग्राफी भी करायी है. नाबालिग ने एसएसपी के नाम दिये गये आवेदन में उल्लेखित बातों को दुहराया है.
अब डीएसपी मामले में अपनी रिपोर्ट सिटी एसपी को सौंपेंगे. नाबालिग ने अपने मुंहबोले चाचा के साथ मंगलवार को सिटी एसपी से मिलकर भूली ओपी प्रभारी अरविंद कुमार के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाया था. इससे संबंधित एक आवेदन भी एसपी को दिया था. सिटी एसपी ने डीएसपी डीएन बंका को मामले की जांच कर 72 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी. डीएसपी के साथ महिला थानेदार को भी लगाया गया था. मामले की जांच में सीडब्ल्यूसी भी लगी थी. डीएसपी व सीडब्ल्यूसी के सदस्यों ने शिकायतकर्ता के घर जाकर मामले की छानबीन की थी.
क्यों नहीं पहुंचे सीडब्ल्यूसी : नाबालिग सीडब्ल्यूसी टीम के समक्ष बुधवार को भी अपने पूर्व के आरोप पर कायम थी. सीडब्ल्यूसी के समक्ष उसे गुरुवार को परिजनों के साथ बुलाया गया था. नाबालिग के माता-पिता भी गुरुवार को सीडब्ल्यूसी नहीं पहुंचे. नाबालिग के माता-पिता डीएसपी के समक्ष उसे लेकर बयान दिलाने आ सकते हैं तो सीडब्ल्यूसी क्यों नहीं पहुंचे.
अब सवाल ये उठता है कि जो युवती 48 घंटे पहले सबके सामने भूली ओपी प्रभारी अरविंद कुमार पर इतने संगीन आरोप लगा रही थी वो एकाएक बदल कैसे गयी? क्या किसी के बहकावे में आकर कोई युवती अपनी ही इज्जत को दावं पर लगा सकती है. अगर ये सही में एक बहकावा था तो बहकाने वाला कौन था, क्या यह जानना पुलिस के लिए जरूरी नहीं? या सिर्फ युवती के आवेदन पर ही मामले का पटाक्षेप हो जायेगा.
