धनबाद शहर में जल संकट अब विकराल रूप ले चुका है और यह समस्या हर साल गर्मी के साथ और गंभीर होती जा रही है. नगर निगम की 917 करोड़ रुपये की बहुप्रतीक्षित जलापूर्ति योजना आठ साल बाद भी अधूरी पड़ी है. इस कारण शहर की करीब तीन लाख आबादी आज भी पेयजल के लिए जूझ रही है. कई इलाकों में पाइपलाइन नहीं बिछी है, तो कहीं पाइपलाइन बिछने के बावजूद जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है. जहां पानी पहुंच भी रहा है, वहां लो-प्रेशर के कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा. डीवीसी से एनओसी नहीं मिलने के कारण इंटेकवेल का काम ठप है. दूसरी ओर आरसीडी से एनओसी नहीं मिलने के कारण कतरी नदी से पाइपलाइन नहीं गुजर पा रही रही है. ऐसे में यह महत्वाकांक्षी योजना कागजों में ही सिमट कर रह गयी है, जबकि शहर की जनता प्यासी है. स्थिति यह है कि जल संकट अब केवल एक मौसमी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक सुस्ती, योजनाओं के खराब क्रियान्वयन और समन्वय की कमी का प्रतीक बन चुका है. यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो आने वाले दिनों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं.
आठ साल से अधूरी 917 करोड़ की जलापूर्ति योजना
शहर की सबसे महत्वाकांक्षी 917 करोड़ की जलापूर्ति योजना आठ वर्षों बाद भी पूरी नहीं हो सकी है. योजना के विभिन्न हिस्सों में काम या तो अधूरा है या बेहद धीमी गति से चल रहा है. सभी योजना एनओसी के कारण पूरी नहीं हो पायी है. स्पष्ट है कि तकनीकी से अधिक प्रशासनिक कारण इस योजना की राह में बाधा बने हुए हैं.
– 441 करोड़ (धनबाद शहरी जलापूर्ति फेज-2) : एलएंडटी द्वारा कार्य, लगभग 74% काम पूरा. डीवीसी से इंटेक वेल के लिए एनओसी नहीं मिलने से काम अटका.- 166 करोड़ (कतरास जलापूर्ति योजना) : श्रीराम ईपीसी द्वारा 62% कार्य पूरा. कतरी नदी में पाइपलाइन बिछाने के लिए एनओसी लंबित.– 310 करोड़ (झरिया जलापूर्ति योजना) : यहां भी एनओसी नहीं मिलने से कार्य की गति धीमी.
