धनबाद : कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, झरिया भौंरा से गायब हुई छात्रा रेशमा परवीन के मामले की प्रशासनिक जांच शुरू हो गयी है. जनांदोलन को देखते हुए उपायुक्त ए दोड्डे ने एसडीएम अनन्य मित्तल को जांच के आदेश दिये थे. शनिवार को एसडीएम ने जांच शुरू कर दी. टीम में सिविल सर्जन डॉ आशा एक्का व डीइओ डॉ माधुरी कुमारी को शामिल किया गया है.
आज एसडीएम ने दोनों अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले पर विमर्श किया और कमेटी को घटना की जांच करने को कहा. टीम यह भी पता करेगी कि किन परिस्थितियों में छात्रा स्कूल से गायब हुई. साथ ही, स्कूल में क्या-क्या खामियां हैं तथा सुधार के लिए कौन-से कदम उठाये जा सकते हैं.
जांच कमेटी को अपनी रिपोर्ट में इन बिंदुओं पर भी सुझाव देने को कहा गया है. एसडीएम ने बताया कि अगले सप्ताह जांच रिपोर्ट डीसी को सौंप दी जायेगी. श्री मित्तल ने बताया कि टीम स्थल निरीक्षण करने जायेगी. जानकार बताते हैं कि एसडीएम ने पीएमसीएच और डीइओ से जांच प्रतिवेदन मांगा है. कमेटी 10 जुलाई को प्रकरण की स्थलीय जांच करेगी. स्कूल प्रबंधन और संबंधित छात्रा को उस दिन उपस्थित रहने को कहा गया है.
क्या है रेशमा प्रकरण : कस्तूरबा स्कूल में कक्षा आठ की छात्रा रेशमा परवीन 18 जून को अचानक अपने हॉस्टल से गायब हो गयी थी. 20 जून को भौंरा के पांच नंबर स्थित हनुमान मंदिर के पास वह रहस्यमय परिस्थिति में मिली थी. उसका घर भौंरा के सात नंबर में है. पिता कासिम बेटी को अस्त-व्यस्त हालत में पाकर सन्न रह गये थे. 20 जून को रेशमा अपने पिता को मिली, तो उसने बताया था कि होस्टल में रखी बोतल का पानी पीने के बाद वह बेहोश हो गयी थी.
जब होश आया तो गोमो जाने वाली ट्रेन में थी. कुछ यात्रियों ने उसे भागा जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया. भागा स्टेशन पर एक महिला ने उसे भौंरा जाने वाले ऑटो में बैठा दिया. पूरे घटनाक्रम में वार्डन की भूमिका को लेकर लोग आंदोलन पर उतर आये. रेशमा हॉस्टल से तीन दिनों तक गायब रही, लेकिन वार्डन ने पुलिस या पीड़िता के परिजन की इसकी सूचना नहीं दी. परिजन व लोग वार्डन पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
