प्रतिनिधि, देवीपुर. झारखंड सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से हिहिडी, पीपीडी, खैरवार वंश, आदिवासी-मूलवासी, जुमिद आदिवासी समाज की पारंपरिक रूढ़िवादी स्वशासन व्यवस्था के पदधारकों को सम्मान राशि नहीं मिलने पर आदिवासी संगठनों ने नाराजगी जतायी है. मामले को लेकर मांझी, पारानिक, जोग-मांझी, नायकी, गोडेत समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.
2018 में पारित हुआ था प्रस्ताव
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में पारंपरिक रूढ़िवादी स्वशासन व्यवस्था के पदधारकों को सम्मान राशि देने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया था. इसके तहत संथाल परगना के दुमका, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज और जामताड़ा जिलों में पारंपरिक पदधारकों को सम्मान राशि दी जा रही है.
संगठनों का आरोप है कि देवघर जिले में प्रस्ताव पारित होने के वर्षों बाद भी अब तक पारंपरिक पदधारकों को सम्मान राशि का भुगतान नहीं किया गया है. इसे आदिवासी समाज के प्रति प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए संगठनों ने नाराजगी जतायी है.
पिछले वर्ष भी सौंपा था मांग पत्र
प्रतिनिधियों ने बताया कि इस मामले को लेकर पिछले वर्ष भी लिखित मांग पत्र सौंपा गया था, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गयी. इससे देवघर जिले के आदिवासी समाज में आक्रोश बढ़ रहा है.
संगठनों ने कहा कि यदि मांग पूरी नहीं की गयी तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे. प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री, विधायक और राष्ट्रपति होने के बावजूद आदिवासी समाज के पारंपरिक पदधारकों की उपेक्षा और लापरवाही अब बर्दाश्त से बाहर है.
जल्द भुगतान की मांग
आदिवासी संगठनों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए देवघर जिले के पारंपरिक रूढ़िवादी स्वशासन व्यवस्था के पदधारकों को जल्द से जल्द सम्मान राशि का भुगतान करने की मांग की है.
ज्ञापन की प्रतिलिपि दुमका के प्रमंडलीय आयुक्त, झारखंड के मुख्यमंत्री, गोड्डा सांसद और दुमका सांसद को भी भेजी गयी है. ज्ञापन देने वालों में महासोरेन, बाबूलाल, हेमलाल हांसदा, सुशील कुमार टुडू समेत अन्य के हस्ताक्षर मौजूद हैं.
