मधुपुर. शहर के भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन व उर्दू के महान अफसानानिगार सआदत हसन मंटो स्मृति दिवस पर याद किया गया. दोनों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया. मौके पर धनंजय प्रसाद ने कहा कि हरिवंशराय बच्चन हिन्दी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से थे. उन्हें सर्वाधिक ख्याति मधुशाला से मिली, तब से वो इलाहाबाद के प्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं. इस काव्य रचना के माध्यम से उन्होंने इंसान व समाज की सच्चाई को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि इंसानी मनोविज्ञान का जैसा नग्न चित्रण मंटो की कहानियों में देखने को मिलती है. वैसा शायद ही किसी अन्य रचनाकारों में दिखती है. ठंडा गोश्त, बू, टोबा टेक सिंह, खोल दो, ऊपर नीचे के दरम्यान व करामत जैसी बहुचर्चित कहानियों के लेखक थे. उर्दू के मशहूर अफसानानिगार सआदत हसन मंटो, मंटो की गिनती उन साहित्यकारों में की जाती है, जिसने वक्त के आगे की रचनाएं लिखी. जिसकी गहराई समझने की कोशिश दुनिया आज भी कर रही है. उन्हें पूरी तरह समझने के लिए सौ साल भी कम होंगे. मंटो अपनी कहानियों में समाज में व्याप्त विद्रूपताओं व पाखंड को बेबाकी से उजागर करते हैं. उनकी कहानियों में सभ्यता और इंसान की पाशविक प्रवृत्तियों के बीच द्वंद्व है, उसे उखाड़ कर रख दिया. अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किया.
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