मधुपुर. शहर के बावन बीघा स्थित विश्व प्रसिद्ध सांख्य योग साधना स्थली कापिल मठ अपनी गौरवशाली यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 14 से 16 मई तक भव्य शताब्दी समारोह मनाने जा रहा है. तीन दिवसीय इस आयोजन में बिहार, बंगाल, झारखंड, असम, ओडिशा, दिल्ली, महाराष्ट्र सहित देशभर के विभिन्न राज्यों से सैकड़ों साधु-संत एवं श्रद्धालु शामिल होंगे. इस दौरान पारंपरिक सामूहिक पाठ, स्मारिका का लोकार्पण तथा महाप्रसाद वितरण जैसे प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे. कापिल मठ को देश का एकमात्र ऐसा मठ माना जाता है, जो पूर्ण रूप से सांख्य-योग साधना पर आधारित परंपरा का पालन करता है. इसकी एक शाखा दार्जिलिंग के कास्यांग में भी स्थित है. कापिल मठ की स्थापना वर्ष 1926 में मधुपुर में सांख्य योगाचार्य स्वामी हरिहरानंद आरण्य ने की थी. बंगाल के एक जमींदार परिवार में जन्मे स्वामीजी ने ईश्वर प्राप्ति की साधना के लिए गृह त्याग कर संन्यास ग्रहण किया था. प्रारंभिक साधना काल में उन्होंने एक निर्जन पहाड़ी पर एकांत जीवन व्यतीत किया, जहां उनकी सीमित संपत्ति केवल एक कंबल, एक तौलिया और एक कमंडल तक थी. वाराणसी, हरिद्वार और ऋषिकेश में साधना के बाद उन्होंने मधुपुर को अपनी तपोभूमि बनाया और यहां एक कृत्रिम गुफा का निर्माण कराया, जिसमें वे सांख्य तत्व चिंतन में लीन रहते थे. इसी काल में उन्होंने बंगला और संस्कृत में कई दार्शनिक ग्रंथों की रचना की. स्वामी हरिहरानंद आरण्य ने 1947 में इसी गुफा में महासमाधि ली. उनके बाद स्वामी धर्ममेघ आरण्य और फिर स्वामी भास्कर आरण्य ने परंपरा को आगे बढ़ाया. 11 फरवरी 2026 को स्वामी भास्कर आरण्य के महाप्रयाण के बाद वर्तमान में मठाध्यक्ष स्वामी करुणा आरण्य इस साधना परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं.
सांख्य-योग साधना स्थल कापिल मठ का शताब्दी समारोह कल से, देशभर से जुटेंगे संत व श्रद्धालु
मधुपुर के बावन बीघा स्थित विश्व प्रसिद्ध सांख्य योग साधना स्थली कापिल मठ में आयोजन
