संवाददाता, देवघर : बाबा मंदिर में मंगलवार को बिसुआ संक्रांति मनायी गयी. इसके साथ ही बांग्ला पंचांग के अनुसार वैशाख मास का शुभारंभ भी हो गया है. संक्रांति के अवसर पर बाबा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और परंपराओं का दौर शुरू हो गया है, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा है. मंगलवार से मंदिर के भीतरखंड कार्यालय स्थित श्रीयंत्र मंदिर में बाबा सहित सभी देवी-देवताओं को सत्तू, आम का टिकोला, गुड़ और दही का भोग लगना शुरू हो गया. यह परंपरा पूरे वैशाख मास तक प्रतिदिन जारी रहेगी. वहीं भोग अर्पण के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.
बाबा मंदिर के गर्भगृह में लगायी गयी गलंतिका
मंगलवार को शाम में जलार्पण के बाद पट बंद होने के समय बाबा पर गलंतिका चढ़ाने की परंपरा निभायी गयी. इसके तहत गर्भगृह में चांदी के घड़े में गंगाजल भरकर शिवलिंग के ऊपर स्थापित किया गया, जिससे बूंद-बूंद जल निरंतर टपकता रहेगा और ये जल बाबा को शीतलता प्रदान करता रहेगा. वहीं शृंगार पूजा के दौरान पट खुलने पर इसे हटा लिया जायेगा. यह व्यवस्था पूरे वैशाख मास तक जारी रहेगी. मंदिर इस्टेट के पुरोहित श्रीनाथ पंडित के अनुसार, भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए हलाहल विष का पान किया था, जिससे उनके कंठ में उष्णता बनी रहती है. वैशाख की तपिश में गलंतिका के माध्यम से उन्हें शीतल जल अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है.
जगह-जगह घट जल का किया गया दान
बिसुआ संक्रांति पर पितृहीन श्रद्धालु घट व जल दान करते दिखे. श्रद्धालु मिट्टी के घड़े में जल, आम का टिकोला, पंखा व वस्त्र रखकर विधिवत पूजा के बाद दान करते दिखे. मान्यता है कि इससे पूर्वजों को पूरे वर्ष शीतलता प्राप्त होती है.
