युवा पीढ़ी को नाटक, जात्रा और संगीत की परंपराओं से जोड़ने पर जोर

रवींद्र नजरुल संध्या को लेकर बंगाली समिति के सदस्यों ने बैठक की, जिसमें समिति के अध्यक्ष ने अपनी राय रखी. इस दौरान सदस्यों ने समाज के युवाओं के लिए गतिविधियां शुरू करने पर विचार किया.

मधुपुर . शहर के अब्दुल अजीज रोड स्थित मधुर बचपन एकेडमी परिसर में गुरुवार को झारखंड बंगाली समिति की बैठक समिति के प्रदेश अध्यक्ष विद्रोह कुमार मित्रा की अध्यक्षता में आयोजित की गयी. बैठक में 26 मई को रवींद्र नजरुल संध्या समारोह पूर्वक आयोजित करने का निर्णय लिया. बैठक में श्रीमित्रा ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य बंगाली संस्कृति, बंगला नाटक, बंगला जात्रा को शुरू करना व युवा-नयी पीढ़ी को कला, नाटक, जात्रा और संगीत जैसी परंपराओं से जोड़ना है. उन्होंने कहा कि मधुपुर शहर कभी बंगला संस्कृति के लिए जाना जाता था. अलग-अलग संस्कृतियों के लोग मिलकर नाटक-जात्रा से शहर को अलग पहचान दिलाते थे. आधुनिक युग में बंगला जात्रा, बंगला नाटक विलुप्त हो रहे है. जबकि नाटक, जात्रा, संगीत समाज को जागरूक करने का शक्तिशाली माध्यम है. समाज में सांस्कृतिक एकता बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोगों तक इसे कैसे पहुंचाया जाये. ताकि युवा अपनी संस्कृति की पहचान को न छोड़े. इस पर गहन चिंतन की जरूरत है. सभी ने संस्कृति और विरासत को बचाने पर जोर दिया. वहीं कहा कि इसकी शुरुआत ””रवींद्र नजरुल संध्या”” से होगा. मौके पर लखी रानी दासी, सम्पा तालुकदार, रमा सिन्हा, माया गांगुली, प्रदीप भादुड़ी, टुमपा बनर्जी, अनिता बनर्जी, सोमा दत्ता, प्रसाद चटर्जी, दिलीप राय, मिंटू घोष, अमूल्य दे आदि सदस्य उपस्थित थे.

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Published by: Balram

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