तनाव से मुक्ति के लिए ध्यान जरूरी : श्री श्री रविशंकर

देवघर: देवघर कॉलेज मैदान में आर्ट अॉफ लिविंग की ओर से आयोजित शिवधरा महासत्संग में श्रीश्री रविशंकर ने जहां लोगों को तनावमुक्ति का मार्ग बताया वहीं झारखंड के भटके युवा व नक्सली गतिविधि में शामिल युवाओं को मुख्य धारा में शामिल होने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि झारखंड में जंगल के बीच उनका आश्रम […]

देवघर: देवघर कॉलेज मैदान में आर्ट अॉफ लिविंग की ओर से आयोजित शिवधरा महासत्संग में श्रीश्री रविशंकर ने जहां लोगों को तनावमुक्ति का मार्ग बताया वहीं झारखंड के भटके युवा व नक्सली गतिविधि में शामिल युवाओं को मुख्य धारा में शामिल होने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि झारखंड में जंगल के बीच उनका आश्रम चल रहा है.

कई नक्सली इस आश्रम में आये, ध्यान सीखा और उनके जीवन में परिवर्तन आया. हजारों लोग मुख्य धारा में लौट चुके हैं. अभी जो नक्सली बचे हैं वे झारखंड के नहीं, बाहर से आये लोग हैं. यहां के स्थानीय युवा मुख्यधारा में आ चुके हैं. बचे-खुचे हैं, वो थोड़े ही हैं. उन्हें भी समझायेंगे.

देश व समाज के लिए दर्द है तो आगे आइये
श्रीश्री ने भटके हुए युवाओं से आह्वान किया कि आपके दिल में देश व समाज के लिए जो पीड़ा है. वे उनकी पीड़ा समझते हैं, उनकी मानसिकता को जानते हैं. सिर्फ पैसा बनाना आपका मकसद नहीं है, नि:स्वार्थ भाव से आपने बंदूक उठाया है तो बंदूक छोड़ कर मुख्य धारा में लौट आइये. सामने आइये, हम आपके साथ हैं. हां, यदि आपने स्वार्थ के लिए बंदूक उठाया है तो इसकी वे निंदा करते हैं. इस धरती को आपकी जरूरत है. आप में पूरी क्षमता है. आप जो कर सकते हैं कोई नहीं कर सकता है. अपनी क्षमता का सदुपयोग करें.
योग, ध्यान व प्राणायाम जरूर करें
श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि आज की भाग दौड़ की जिंदगी में लोगों के पास पैसा है, अच्छा बिस्तर है, एशोआराम की साधन हैं लेकिन शांति नहीं है. आज के परिवेश में हम सभी तनावग्रस्त हैं. इसलिए तनाव से मुक्ति पाना है तो ध्यान की शरण में जाना होगा. आपके पास पैसे हैं, भोजन है, बिस्तर है मगर तनाव है, ऐसे में सुख तो दूर शांति नहीं है. परिस्थिति में परिवर्तन लाना है तो हमें खुद कदम उठाना होगा. इसलिए योग, ध्यान व प्राणायाम जरूर करें. अपने जीवन के लिए 20 मिनट अलग रखें. इससे मस्तिष्क का विकास होगा, शरीर मजबूत होगा. श्रीश्री ने कहा कि हिंसा रहित समाज, स्वास्थ शरीर, कंपनरहित श्वास, ब्रह्मरहित मन, पूर्वाग्रह रहित बुद्धि/मस्तिष्क, प्रसन्नचित व शौकरहित जीवन अपनाना हो तो ध्यान की शरण में जाना होगा. क्योंकि कोई भी पूजा पाठ ध्यान के बिना नहीं होता है.

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