देवघर में मुख्यमंत्री जन-वन योजना फ्लॉप

देवघर: राज्य में पर्यावरण संतुलन बनाये रखने व हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए वन विभाग से मुख्यमंत्री जन-वन योजना की शुरूआत की गयी थी. देवघर में भी योजना चालू करने के लिए खिजुरिया स्थित वन विभाग के गेस्ट हाउस में काफी ताम-झाम किया गया था. लेकिन देवघर में मुख्यमंत्री जन-वन योजना फ्लॉप रही. सबसे पहले […]

देवघर: राज्य में पर्यावरण संतुलन बनाये रखने व हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए वन विभाग से मुख्यमंत्री जन-वन योजना की शुरूआत की गयी थी. देवघर में भी योजना चालू करने के लिए खिजुरिया स्थित वन विभाग के गेस्ट हाउस में काफी ताम-झाम किया गया था. लेकिन देवघर में मुख्यमंत्री जन-वन योजना फ्लॉप रही. सबसे पहले तो इतनी महत्वाकांक्षी योजना में महज 119 किसानों ने ही योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया, इसमें भी केवल आठ लाभुकों योजना लाभ वन विभाग दे पायी.

119 किसानों ने कुल 266 एकड़ निजी जमीन पर योजना के तहत फलदार व काष्ठ प्रजाति के पौधे लगाने के लिए आवेदन दिया था, उसमें आठ किसानों को 42 एकड़ भूमि पर ही योजना लाभ मिला है. इन आठ किसानों में देवघर प्रखंड के पंकज झा, मुकेश प्रसाद यादव, रामेश्वर प्रसाद राय, उदयनारायण साह. मोहनपुर प्रखंड के राजेंद्र प्रसाद यादव, वर्द्यन मोदी व मधुपुर प्रखंड के फिरोज आलम व एखलाक अंसारी है. इस योजना के तहत राजस्व अभिलेखों के अनुसार जमीन पर उचित स्वामित्व रखने वाले किसानों को अपने निजी जमीन पर पौधा लगाना था, इसमें खेत की मेढ़ पर पौधे लगाने थे.

इन प्रताजियों का पौधा लगाना था : किसान अपने निजी जमीन पर काष्ठ प्रजातियों में शीशम, सागवान, गम्हार, महोगनी, एकासिया समेत फलदार पौधों में कलमी आम, कटहल, अमरुद, आंवला, बेल व लिची का पौधा लगाना था. मोहनपुर में लाभुक वर्द्यन मोदी ने इस योजना के तहत नियमानुसार अपनी जमीन पर काष्ठ व फलदार पौधे तो जरूर लगाये, लेकिन आज पौधे नष्ट हो चुके हैं. हालांकि इस योजना में पौधों की सुरक्षा का दायित्व लाभुकों का ही है.
योजना में 50 फीसदी राशि विभाग को देना है : मुख्यमंत्री जन-वन योजना के तहत लाभुकों को पौधरोपण व रख-रखाव पर होने वाले खर्च में 50 फीसदी अंश वन विभाग से भुगतान किया जाना है, लाभुकों को तीन वर्ष के दौरान तीन किस्तों में भुगतान विभाग द्वारा सीधे लाभुकों के खाते में करना है. दोनों प्रजाति के पौधों में तीन वर्षों में कुल 64,862 रूपया भुगतान होना है.
मुख्यमंत्री जन-वन योजना में ऑनलाइन की प्रक्रिया से किसानों ने आवेदन जमा किया है. किसानों को जमीन के स्वामित्व का दस्तावेज अंचल कार्यालय से सत्यापित कर मांगा गया था, लेकिन अधिकांश किसानों के जमीन के स्वामित्व का सत्यापन ही नहीं हो पाया. जमीन के स्वामित्व नहीं होने से किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया. अंचल कार्यालय से अगर जमीन का सत्यापन हो जात तो सभी आवेदकों को लाभ मिल सकता था.
– मानेल टुडू, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रमंडल, देवघर

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