पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में न्यायालय हुए रिहा
सांसद के आमरण अनशन के दौरान 10 सितंबर 2011 को हुई थी घटना
देवघर : सांसद निशिकांत दुबे के आमरण अनशन के दौरान हुई नोक-झोंक व सरकारी कार्य में बाधा डालने की घटना को लेकर दर्ज हुए मामले में आरोपितों को राहत मिल गयी. उक्त घटना को लेकर जीआर केस नंबर 758/2011 दर्ज हुआ था जिसके चारों आरोपित राजनारायण खवाड़े उर्फ बबलू खवाड़े, विशाल सर्राफ,
कन्हैया खवाड़े व प्रदीप रमानी को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया गया. साथ ही सभी जमानतदारों को भी उतरदायित्व से मुक्त कर दिया गया. इस मामले में महज एक गवाह उपस्थित हुए व अन्य गवाह उपस्थित नहीं हुए. न्यायालय द्वारा नोटिस भेजने के बाद भी गवाह कोर्ट में नहीं आये. इस मामले में दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सभी आरोपितों को रिहा कर दिया गया. बचाव पक्ष से वरीय एडवोकेट अमर कुमार सिंह ने पक्ष रखा जबकि अभियोजन पक्ष से सहायक लोक अभियोजक सत्येंद्र कुमार राय ने बहस की.
क्या था मामला : दर्ज प्राथमिकी के अनुसार वर्ष 2011 में 10 सितंबर को रात करीब साढ़े आठ बजे आरोपितों तथा सांसद व पुलिस के साथ नोक-झोंक की घटना हुई थी व सरकारी कार्य में बाधा डाला गया था. माइक पकड़ कर छीनने का भी खुलासा किया गया था. सांसद निशिकांत दुबे जन समस्याओं को लेकर आमरण-अनशन पर बैठे थे. वहां पर तैनात पुलिस कर्मी राम सोहावन राम के बयान पर नगर थाना में कांड संख्या 276/2011 दर्ज किया गया था. इसमें उपरोक्त चारों को आरोपित बनाया व भादवि की धारा 143, 144, 149, 188, 353, 505 बी, 506 लगायी गयी थी.
