मधुपुर: रांची-पटना जैसे बड़े शहरों की तरह अब मधुपुर व देवघर के सड़कों पर गुलाबी ऑटो नजर आयेंगे. महिला सशक्तिकरण का सफल उदाहरण बन चुके गुलाबी ऑटो को महिलाएं चलाती हैं और वे पुरुषों की तरह लोगों को सुविधा उपलब्ध कराती हैं. देवघर व मधुपुर जैसे छोटे शहरों में बेटियों का ऑटो चलाते दिखना एक बड़ी बात होगी. इसके लिए दो महीने की ट्रेनिंग लेकर 18 युवतियाें व महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए देवघर डीटीओ ऑफिस में आवेदन दिया है. इन सभी की उम्र 18 वर्ष से 35 वर्ष के बीच है. मधुपुर के बावनबीघा स्थित फुलीन चेतना विकास केंद्र ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है.
विभिन्न गांवों से ड्राॅप आउट लड़कियों का चयन कर एफभीटीआरएस बेंगलुरु के सहयोग से 15 नवंबर से कार्यालय परिसर में नियमित प्रशिक्षण दिया. प्रशिक्षण के लिए संस्था ने देवघर के एक ऑटो ड्राइविंग सेंटर के प्रशिक्षक शास्तीपादा कुंभकार से संपर्क किया. मानसिक रूप से भी सभी को तैयार कर रोजाना तकरीबन चार घंटे की ट्रेनिंग दी गयी. अब इन्हें पांच दिवसीय उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इन्होंने कहा कि दिन में ऑटो चलाने को प्राथमिकता देंगे. सुरक्षा के ख्याल से महिलाओं व बच्चों की सेवा को प्राथमिकता देगी.
आसपास की हैं सभी आवेदिका
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली ये सभी मधुपुर प्रखंड के धावाटांड़, पथलचपटी, पिपरासोल, महुआडाबर, छोटा रोशन, पनाहकोला, आमतल्ला भेडवा, मारगोमुंडा के टिटीचापर व चेतनारी व मोहनपुर व देवघर की हैं.
कहते हैं परियोजना समन्वयक
योजना के समन्वयक सिकंदर आलम ने कहा कि सभी को नि:शुल्क गैर सरकारी व गैर आवासीय प्रशिक्षण देकर ऑटो चलाने के लिए पूरी तरह तैयार किया गया है. अब उनका प्रयास है कि किसी बैंक से सभी को जोड़ कर ऑटो खरीदने के लिए ऋण दिला कर इसकी शुरुआत की जाये. इसलिए ऋण मुहैया कराना प्राथमिकता होगी.
इन्होंने प्राप्त किया प्रशिक्षण
ऑटो चलाने का प्रशिक्षण सनोदी टुडू, मितल हांसदा, कहकसा परवीन, सितारा बानो, सोनिया सोरेन, रूपा कुमारी, बाहामुनी सोरेन, देवीमुनी हेम्ब्रम, विनिता मरांडी, काजल कुमारी, सावित्री कुमारी, मंजु कुमारी, मानो कुमारी, मेरेसा कुमारी, पक्कु कुमारी, फुलमनी सोरेन, काजल व रीता मुर्मू ने प्राप्त किया है. प्रशिक्षण के बाद सभी काफी उत्साहित दिखीं.
