तपती धूप में भी नहीं डगमगायी आस्था, बाबा बैद्यनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब संवाददाता, देवघर अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सोमवार को बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. करीब साठ हजार श्रद्धालुओं ने बाबा सहित अन्य मंदिरों में जलार्पण कर सुख-समृद्धि की कामना की, जबकि 5281 भक्तों ने कूपन के माध्यम से पूजा-अर्चना की.सुबह से शाम तक जलार्पण और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में देखी गईं. भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गईं, जिससे श्रद्धालुओं को काफी हद तक राहत मिली. मंदिर परिसर में लगाए गए टैंट और अस्थायी सुविधाएं श्रद्धालुओं के लिए सहारा साबित हुईं. आम कतार मानसरोवर क्षेत्र से संचालित हो रही थी, जहां जलार्पण में लगभग तीन घंटे का समय लग रहा था. शीघ्रदर्शनम कूपन कटाने वाले श्रद्धालुओं को राहत वहीं कूपनधारी श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा केंद्र होल्डिंग प्वाइंट से व्यवस्था की गई, जिससे वे करीब सवा घंटे में बाबा का जलाभिषेक कर सके. अक्षय तृतीया के शुभ संयोग के कारण उपनयन और मुंडन संस्कारों की भी भारी भीड़ देखी गई. दिनभर में सौ से अधिक उपनयन और लगभग एक हजार मुंडन संस्कार संपन्न कराए गए. इसके अलावा विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा. भीड़ के दबाव को देखते हुए मंदिर का पट शाम छह बजे बंद कर दिया गया. सहरसा से आए मधुबन झा ने बताया कि वे अपने परिवार के उपनयन संस्कार में शामिल होने पहुंचे हैं, जिसमें लगभग पांच लोग शामिल हुए हैं. पूरे दिन हर अनुष्ठान स्थल पर पचास से सौ लोगों की भीड़ बनी रही, जिससे मंदिर परिसर आस्था और उत्साह से भरा रहा.
अक्षय तृतीया: 60 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण, सौ से अधिक उपनयन संपन्न
अक्षय तृतीया के पावन दिन बाबा बैद्यनाथ धाम में लगभग साठ हजार श्रद्धालुओं ने जलार्पण और पूजा-अर्चना कर आस्था का सैलाब लगाया। 5281 भक्तों ने कूपन से विशेष सुविधा के तहत जलाभिषेक किया। मंदिर प्रशासन ने भीड़ को संभालने के लिए टेंट और अस्थायी इंतजाम किए। मानसरोवर क्षेत्र में जलार्पण के लिए तीन घंटे तक कतार लगी। इस मौके पर उपनयन और मुंडन संस्कारों की भीग भी हुई, जिसमें सौ से अधिक उपनयन और लगभग एक हजार मुंडन संस्कार संपन्न हुए। विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए, जिससे परिसर में उत्सव का माहौल रहा। भीड़ के कारण मंदिर शाम छह बजे बंद कर दिया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर आस्था और उत्साह से परिपूर्ण रहा।
