मधुपुर : हावड़ा-किऊल रेलखंड के काशीटांड़ हॉल्ट के पास ट्रेन दुर्घटना होने के बाद अप व डाउन लाइन की सभी ट्रेनों का परिचालन 18 घंटा पूरी तरह से बंद रहा. अप लाइन पर 18 घंटे बाद परिचालन प्रारंभ तो हो गया. लेकिन डाउन लाइन पर 23 घंटे बाद भी परिचालन प्रारंभ नहीं हो पाया है. स्टेशन पर विभिन्न जगहों में जाने के लिए यात्री शनिवार शाम से ही परेशान है.
स्टेशन पर पानी व खाना के लिए भटकते रहे पैसेंजर
मधुपुर : हावड़ा-किऊल रेलखंड के काशीटांड़ हॉल्ट के पास ट्रेन दुर्घटना होने के बाद अप व डाउन लाइन की सभी ट्रेनों का परिचालन 18 घंटा पूरी तरह से बंद रहा. अप लाइन पर 18 घंटे बाद परिचालन प्रारंभ तो हो गया. लेकिन डाउन लाइन पर 23 घंटे बाद भी परिचालन प्रारंभ नहीं हो पाया है. […]

सैकड़ों यात्रियों ने अपना आरक्षित टिकट लौटा दिया है. हालांकि जिनका जरूरी काम था. ऐसे दर्जनों यात्री निजी वाहन, भाड़ा के वाहन या बस रूट से गंतव्य के लिए प्रस्थान किया. इधर, डाउन लाइन पूरी तरह से बाधित रहने के कारण सीतामढ़ी-सियालदाह एक्सप्रेस मधुपुर स्टेशन पर 24 घंटे से खड़ी है.
स्टेशन में खाने की कोई व्यवस्था नहीं है. शौचालय में भी पानी खत्म हो गया. इसको लेकर रेल यात्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. वहीं, यात्री सरस्वती देवी ने बताया कि वे लोग परिवार के बच्चे के साथ समस्तीपुर से ट्रेन में कोलकाता जाने के लिए सवार हुई थी. लेकिन घंटों से मधुपुर स्टेशन में ट्रेन खड़ी है.
किसी भी शौचालय में घंटों से पानी नहीं है. भूख से वे लोग परेशान है. मो. निजामुद्दीन ने बताया कि वे डूभा स्टेशन में ट्रेन पर चढ़े थे. उन्हें सियालदह जाना था. 22 घंटे से अधिक समय तक एक ही स्टेशन पर ट्रेन को रोका गया है. रेल प्रशासन ने किसी भी प्रकार की सुविधा मुहैया नहीं कराया है. कई यात्रियों के पास खरीद कर खाने के लिए पैसा नहीं है.
मो. जाहीद सिदो से सियालदह जा रहे थे. उन्होंने बताया कि यात्री घंटों से परेशान रहे. मधुपुर से कोलकाता पहुंचने के लिए छह घंटा लगता. लेकिन 24 घंटे तक मधुपुर में ही रोक दिया गया है. रात भर से जगे हुए है. यात्रियों के लिए कोई इंतजाम नहीं है. रेल यात्री फूलबाबू साव ने बताया कि वे दलसिंहसराय से सियालदह जा रहे हैं.
कुछ घंटे का ही काम था. रविवार को उन्हें घर लौटना था. लेकिन वे रविवार शाम तक मधुपुर में ही है. मो. शब्बीर ने कहा कि कई ट्रेनों का रूट डायवर्ट किया गया. लेकिन उन लोगों के लिए कोई व्यवस्था रेल प्रशासन नहीं किया. वे जमुई से सियालदह जा रहे थे. सभी को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. भूखे प्यासे लोग तड़प रहे हैं.