देवघर : मोहनपुर प्रखंड के मोरने पंचायत स्थित बसडीहा गांव निवासी गरीब बिरजू कापरी व उनकी पत्नी हेमिया देवी अपने बच्चों के साथ एक झोपड़ी में जीवन काट रहे हैं. बिरजू के पास एक पक्के का छत तक नहीं है.
मिट्टी की दीवार व प्लास्टिक की छावनी में पूरा परिवार गुजर-बसर कर रहा था, पिछले दिनों आयी आंधी व बारिश में दीवार भी गिर गयी व प्लास्टिक भी उड़ गया. अब पुराने उजड़े घर से कुछ दूरी पर बिरजू अपने परिवार के साथ प्लास्टिक की झोपड़ी बनाकर रह रहा है. बिरजू व हेमिया देवी मजदूरी कर भरण-पोषण करते हैं.
हेमिया बताती है कि इतना पैसा नहीं है जो घर बना पाये, कई बार ग्राम पंचायत कार्यालय व प्रखंड कार्यालय में अफसर व मुखिया से गुहार लगा चुके हैं, बावजूद प्रधानमंत्री आवास नहीं मिल पाया. हेमिया देवी का राशन कार्ड भी है. गरीबी रेखा की सूची में नाम भी दर्ज है, बावजूद पीएम आवास नहीं मिल पाया.
पशु शेड भी मिल जाता तो एक कोना में जीवन गुजार लेते
हेमिया देवी का कहना है कि मनरेगा से पशु शेड अगर मिल जाता तो शायद एक कोने में वह अपना आशियाना बनाकर जीवन काट लेते. पंचायत से पशु शेड देने का आश्वासन मिला था, इसके लिए पांच हजार रुपया भी देना पड़ा. आज तक पशु शेड नसीब नहीं हुआ. अब तो आस टूट चुकी है. इसी प्लास्टिक की झोपड़ी में जिंदगी काट लेंगे.
माेरने पंचायत के बसडीहा गांव का रहने वाला है परिवार
दफ्तर का काटा चक्कर
अफसर व मुखिया से भी लगायी गुहार
नहीं मिला पीएम आवास
क्या कहती हैं मुखिया
बिरजू कॉपरी का नाम प्रधानमंत्री आवास में एक नंबर की सूची में दर्ज है. विभाग से स्वीकृति नहीं मिल पायी है. स्वीकृति मिलने पर ही प्रखंड स्तर से काम शुरू होगा. पशु शेड का काम जल्द चालू होगा.
सुमिता कुमारी, मुखिया, मोरने पंचायत
