सारवां : आजादी के पूर्व अंग्रेजों के जमाने में बना सारवां थाने का भवन व आवास इन दिनों जर्जर हालत में है. पुलिस पदाधिकारियों के आवासन को लेकर बनाये गये कई क्वार्टर ध्वस्त हो चुके हैं, जबकि कई जर्जर हालत में हैं.
कहने को तो पुलिस आधुनिकीकरण में सरकार करोड़ों खर्च कर रही है, बावजूद सारवां थाने के पदाधिकारी समेत पुलिसकर्मी चदरे व खपरैल के आवास में रहने को मजबूर हैं. कई बार तो पुराने भवन की छत के टुकड़े गिर पड़ते हैं.
थाना भवन की मरम्मत कराने के बाद भी बारिश का पानी रिसता रहता है. थाना से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पदाधिकारियों के लिए चार आवास हैं. शेष लोग पुराने आवास में रहने को बाध्य हैं. वहीं जवानों के लिए आवास की कोई व्यवस्था नहीं है.
जवान एक बड़े पुराने हाॅल में समय काटते हैं और हथियार बिस्तर पर साथ लेकर सोते हैं. गश्ती करने के लिए थाने में एक खटारा जीप है. गाड़ी 24 घंटे चलाने के लिए एकमात्र चालक है. वहीं थाना प्रभारी के चलने के लिए एक सूमो विक्टा है, जो थाने का चौकीदार चलाता है.
बिजली की कमी को दूर करने के लिए थाना में सोलर पावर प्लांट लगाया गया था, जो तीन साल से खराब पड़ा है. अपराधियों को रखने का हाजत भी जर्जर हो चुका है. थाने में बाउंड्री का अभाव है. चारों तरफ कंटीले तार की घेराबंदी है. थाने में मालखाना भी नहीं है.
कौन-कौन इलाका है इस थाना क्षेत्र में
बैजूकुरा, नारंगी, पहारिया, कोशमाहा, रक्ति, डहुवा, डकाय, बंदाजोरी, दोंदिया, वनवरिया, जियाखाडा, भंडारो, सारवां, लखोरिया के अलावा बरमोतरा पंचायत के कई गांव.
