देवघर : देवघर में जिला स्तरीय कमेटी (डीएलीसी ) में एलपीसी के लिए दाखिल कई आवेदनों को दस्तावेज सही रहने के बाद भी खारिज कर दी गयी थी. इनमें से कई आवेदकों ने झारखंड हाइकोर्ट में डीएलसी के आदेश को चुनौती दी थी जहां पर दोनों पक्षों की ओर से बहस सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश आने से राहत मिली व न्याय की आस जगी.
हाइकोर्ट में याचिका दाखिल करने वालों की ओर से अधिवक्ता विनीत प्रकाश ने बहस की, जबकि सरकार की ओर से सुनीता कुमारी ने पक्ष रखा. एक याचिका मीनू मुखर्जी की ओर से दाखिल की गयी थी जिसमें स्टेट ऑफ झारखंड, सचिव राजस्व पंजीयन व भूमि सुधार विभाग झारखंड सरकार, डीसी देवघर, एसी देवघर, जिला उपनिबंधक देवघर व सीओ मोहनपुर को प्रतिवादी बनाया गया था.
इसमें उल्लेख है कि फरवरी 2018 में एलपीसी को डीएलसी ने खारिज कर दी थी. जमीन बसौड़ी सत्व का था जिसकी रकवा तीन हजार वर्गफीट मौजा रामपुर का था. हाइकोर्ट ने सुनवाई के बाद जिला स्तरीय कमेटी के आदेश को निरस्त कर दिया व 15 दिनों के अंदर एलपीसी देने का आदेश दिया. कहा है कि इसकी सर्टिफाइड कॉपी दाखिल करने के पंद्रह दिनों के बाद आवेदकों को पक्ष में एलपीसी जारी करें.
दूसरी याचिका कुसुमलता देवी, चन्द्रभान सिंह, इंद्रभान सिंह, गीता देवी व दो अन्य नाबालिग की ओर से दाखिल की गयी थी. इसमें झारखंड सरकार, सचिव राजस्व पंजीयन भूमि सुधार विभाग, डीसी देवघर, एसी देवघर, जिला उप निबंधक, सीओ देवघर व विधि शाखा के प्रभारी पदाधिकारी को प्रतिवादी बनाया गया था.
इस याचिका में भी देवघर के रहने वाले हाइकोर्ट के अधिवक्ता विनीत प्रकाश ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखा जबकि प्रतिवादियों की ओर से सरकारी वकील ने पक्ष रखा. यह जमीन मौजा धौनी जसीडीह के निकट वार्ड संख्या 8 नगर निगम क्षेत्र में अवस्थित है. दोनों याचिकाओं की सुनवाई हाइकोर्ट के जस्टिस आर शंकर की बेंच द्वारा हुई व आदेश पारित किया गया.
