देवघर : दुमका के तर्ज पर देवघर में भी भूमि संरक्षण के तालाबों की खुदाई में गड़बड़ियां हुई है. तालाब की खुदाई में हुई खानापूर्ति की कई शिकायतों के बाद भी स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई है. देवघर जिले में दर्जन भर तालाबों की लिखित शिकायत की गयी है, लेकिन विभागीय अधिकारी से जांच करवाकर खानापूर्ति कर दी गयी.
भूमि संरक्षण के राज्यादेश के अनुसार बंंजर भूमि राइस फेलो योजना में पुराने तालाबों को गहरा करना था, इसमें सरकारी व निजी दोनों तालाब हैं. इन तालाबों का चयन कर खुदाई से पहले विभाग के अभियंता द्वारा पूर्व के खोदे गये गड्ढे व गहराई की मापी कर पुस्तिका में दर्ज की जाती है, लेकिन भूमि संरक्षण के अभियंता ने कई तालाबों के मापी में गहराई कम दर्शा कर पुस्तिका में दर्ज की है.
जबकि कई तालाबों में गहराई अधिक थी. छह फीट की गहराई को तीन फीट तक दर्शाया गया है. बरसात के ठीक पहले खुदाई में खानापूर्ति कर एमबी में प्राक्कलन के अनुसार गहराई को दिखा दिया गया व राशि की निकासी हो गयी. बारिश के बाद तालाब में पानी भरने से जांंच भी लीपापोती हो गयी. विभाग भी बारिश में मिट्टी भरने की बात कहकर अक्सर पल्ला झाड़ लेती है.
करतोरायडीह व असनपुर में भी गड़बड़ी की शिकायत
देवीपुर प्रखंड खीरवातरी में नौ एकड़ की जमीन को विभाग ने निजी तालाब को जीर्णोद्धार के लिए चयन कर लिया, जबकि राज्यादेश के अनुसार के पांच एकड़ जलक्षेत्र की जमीन को ही चयन किया जाना है. विभाग के पदाधिकारी की रिपोर्ट में भी अंतर है. खीरवातरी में पानी पंंचायत के गठन को लेकर आम सभा में केवल छह व्यक्ति ही तस्वीर में शामिल है. इसकी शिकायत मिलने पर डीडीसी सुशांत गौरव ने ने डीआरडीए डायरेक्टर इंदु रानी को जांच का निर्देश दिया है. हालांकि यहां शिकायत के बाद भुगतान पर रोक लगा दी गयी है. देवीपुर प्रखंड के करतोरायडीह व देवघर प्रखंड के सगदाहा समेत मोहनपुर प्रखंड के असनपुर में भी तालाब जीर्णोद्धार में खानापूर्ति कर लाखों रुपये के भुगतान की शिकायत की गयी है. असनपुर के ग्रामीण ने तो लोकायुक्त से जांच की मांग रखी है.
