देवघर: बाबा मंदिर में कामना लिंग पर सुलभ जलार्पण के लिए बिना आधारभूत संरचना को ठीक किये नयी व्यवस्था कारगर नहीं हो सकती है. जिला प्रशासन को हर हाल में शिव भक्तों को अधिक से अधिक सुविधा बहाल करनी चाहिए.
जिस मकसद से बाबा बैद्यनाथ प्रबंधन बोर्ड का गठन हुआ है. वह पूरा नहीं हो पा रहा है. बोर्ड के कई सदस्यों को अब तक बाबा मंदिर व आसपास की भौगोलिक जानकारी तक नहीं है. बोर्ड गठन के 13 वर्ष होने के बाद भी पानी, बिजली, यातायात आदि समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. ये बातें विश्व प्रसिद्ध श्रवणी मेले की तैयारी को लेकर प्रभात खबर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित परिचर्चा में बुद्धिजीवियों ने कही. परिचर्चा में श्रवणी मेले में देश-विदेश से आये शिवभक्तों के सुलभ जलार्पण सह दर्शन पर विस्तार से चर्चा की गयी. इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने बेबाक विचार दिये.
परिचर्चा में अधिकांश बुद्धिजीवी प्रबंधन बोर्ड की कार्यशैली से नाराज दिखे. परिचर्चा में कहा गया कि बोर्ड के सदस्यों को मंदिर से बाहर निकल कर सेवा करना चाहिए था. एक सर्किट बना कर बाबा मंदिर, शिवगंगा, शिवगंगा गली, मानसरोवर, जलसार, नाथबाड़ी, मारवाड़ी कांवर संघ, हिंदी विद्यापीठ आदि जगहों को तीर्थयात्रियों के हित में अपने अंडर में लेकर विकसित करना चाहिए. उसे केवल अरघा व बैंड सिस्टम से उपर उठ कर देखना चाहिए.
पिछले साल की भादो मेला की व्यवस्था सफल रही है. उसे अपनाने के बजाय प्रशासन अपने निर्णय पर अडिग है. इससे मेला का विकास कम नुकसान अधिक हो रहा है. मेला में भक्तों की संख्या दो साल में घटी है. इससे देवघर के लोगों की रोजी-रोटी मारी जा रही है. कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष प्रो डा सुरेश भारद्वाज ने की. जबकि मंच संचालन जैन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन ने की. मौके पर महामंत्री कार्तिक नाथ ठाकुर, अखिल भारतीय तीर्थपुरोहित महासभा के वरीय पदाधिकारी विनोद दत्त द्वारी, डिप्टी मेयर संजयानंद झा, प्रो सुंदर चरण मिश्र, राजेश राजपाल, मनोज नेवर, नारायण टिबड़ेवाल, पार्षद शैलजा देवी आदि ने अपने विचार रखे.
