देवघर: सरकार की धान अधिप्राप्ति योजना का लाभ किसानों को समय पर नहीं मिला. नेकॉफ संस्था को खाद्य आपूर्ति विभाग ने एक सप्ताह के अंदर किसानों से खरीदे गये धान का भुगतान करने की जिम्मेवारी दी थी, लेकिन नेकॉफ संस्था इसमें विफल रही. नेकॉफ की इस लापरवाही पर खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव विनय कुमार चौबे ने 29 जून को नेकॉफ संस्था को ब्लैक लिस्टेड करते हुए धान की खरीदारी के कार्य से मुक्त कर दिया है. सचिव के अनुसार, नेकॉफ ने विभागीय आदेशों व एकरारनामा की शर्तों का उल्लंघन कर योजना के उद्देश्य को विफल किया है.
नेकॉफ को ब्लैक लिस्टेड किये जाने के बाद सरकार ने किसानों की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए नयी नीति बनायी है. देवघर जिले में अब भी तीन सौ किसानों का लगभग 70 लाख रुपये बकाया है. इन किसानों काे भुगतान अब झारखंड राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के जरिये होगा. खाद्य आपूर्ति विभाग के स्तर से पैक्सों से धान खरीदारी का सत्यापन किये जाने के बाद विपत्र एसएफसी(दुमका) को भेजी जायेगी. एसएफसी के जीएम के माध्यम से संबंधित किसानों के खाते में सीधे राशि का भुगतान किया जायेगा. सत्यापन का कार्य बीडीओ व बीसीओ द्वारा उप पैक्सों में किया जा रहा है, जहां किसानों ने धान बेचा है. पैक्स में मौजूद धान प्राप्ति की रसीद व स्टॉक का सत्यापन हो रहा है, साथ ही अगर धान राइस मिल भेज दिया गया है तो उसकी रसीद का सत्यापन किया जा रहा है.
चार प्रखंडों का सत्यापन कर भेजा गया विपत्र
खाद्य आपूर्ति कार्यालय से बीडीओ व बीसीओ द्वारा पैक्सों में सत्यापन किये जाने के बाद चार प्रखंडों के किसानों के बकाया विपत्र एसएफसी को भेज दिया गया है. इसमें देवीपुर, सारवां, मोहनपुर व करौं प्रखंड के कुल 28 लाख रुपये बकाया विपत्र एसएफसी को भेजा गया है. शेष प्रखंडों का सत्यापन चल रहा है.
डीसी ने कहा
नेकॉफ संस्था को ब्लैक लिस्टेड किये जाने के बाद एसएफसी द्वारा किसानों को धान अधिप्राप्ति का बकाया राशि दिया जायेगा. पैक्सों में सत्यापन कर कार्य चल रहा है. सत्यापन में धान का स्टॉक व राइस मिल भेजे जाने की पुष्टि होने के बाद किसानों को भुगतान होगा. यह कार्य तेजी से चल रहा है. किसानों को पूरी पारदर्शिता के साथ एसएफसी द्वारा आरटीजीएस से किसानों के बैंक खाते में धान का बकाया राशि भुगतान होगा.
– राहुल कुमार सिन्हा, डीसी, देवघर
