एनजीओ के जिम्मे पहाड़िया के आवास का निर्माण

देवघर: गरीबों से जुड़ी योजनाओं पर पदाधिकारी कितने संवेदनशील हैं, यह कल्याण विभाग से संचालित बिरसा मुंडा आवास योजना के आंकड़े दर्शा रहे हैं. लुप्त होती पहाड़िया जनजाति को बचाने के लिए सरकार ने बिरसा मुंडा आवास योजना की शुरुआत की थी. लेकिन वित्तीय वर्ष 2014-15 में पालोजोरी व सारवां प्रखंड में मुहैया कराये गये […]

देवघर: गरीबों से जुड़ी योजनाओं पर पदाधिकारी कितने संवेदनशील हैं, यह कल्याण विभाग से संचालित बिरसा मुंडा आवास योजना के आंकड़े दर्शा रहे हैं. लुप्त होती पहाड़िया जनजाति को बचाने के लिए सरकार ने बिरसा मुंडा आवास योजना की शुरुआत की थी. लेकिन वित्तीय वर्ष 2014-15 में पालोजोरी व सारवां प्रखंड में मुहैया कराये गये 73 बिरसा मुंडा आवास की राशि दो वर्ष में खर्च नहीं हो पायी. 73 बिरसा मुंडा आवास योजना निर्माण की जिम्मेवारी दोनों प्रखंडों के बीडीओ को दी गयी थी. इसमें सारवां प्रखंड में 43 व पालोजोरी प्रखंड में 30 बिरसा मुंडा अावास का निर्माण बीडीओ के माध्यम से कराना था, इसके लिए प्रखंडों को 27 लाख रुपये आवंटित की गयी. इसमें प्रति लाभुक 1.31 लाख रुपये दिया जाना था, दो वर्ष तक प्रखंडों के बैंक खाते में राशि पड़ी रही, लेकिन ईंट नहीं जोड़ा जा सका.
विभाग के निर्देशानुसार पैसा खर्च करने में असफल बीडीओ ने राशि सरेंडर कर दिया. अब इन पहाड़िया जनजाति को कल्याण विभाग के निर्देश पर एनजीओ को बिरसा मुंडा आवास निर्माण की जिम्मेवारी दी गयी है. इसमें सारवां प्रखंड में ग्राम ज्याेति व लोक प्रेरणा समाधान तथा पालोजोरी प्रखंड में संस्कार संस्था को आवास निर्माण का कार्य सौंपा गया है.
तीन माह में एनजीओ ने 50 फीसदी काम पूरा किया
एनजीओ को काम सौंपे जाने के बाद तेजी आयी है. कल्याण विभाग को भेजी गयी रिपोर्ट के अनुसार महज तीन माह के दौरान एनजीओ ने 50 फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया है. सारवां प्रखंड में 20 व पालोजोरी प्रखंड में 25 आवास का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है. अन्य प्रखंडों में भी चालू वित्तीय वर्ष में आवंटित बिरसा मुंडा आवास कार्य एनजीओ को ही सौंप दिया है. नये वित्तीय वर्ष में सोनारायठाढ़ी प्रखंड में 10, मोहनपुर प्रखंड में नौ व मारगोमुंडा में पांच आवास पर कार्य चल रहा है. वित्तीय वर्ष में भी 27 लाख आवंटित है.
सारवां व पालोजोरी प्रखंड में बिरसा मुंडा आवास योजना को समय पर पूर्ण कराने के लिए बीडीओ से कई बार पत्राचार किया गया, दो वर्ष बाद भी राशि खर्च नहीं करने पर अंत ने राशि सरेंडर कर दिया. अब एनजीओ के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है. एनजीओ तेज गति से कार्य कर रहे हैं. तीन माह में 50 फीसदी काम पूर्ण हो चुका है. इसमें कड़ी निगरानी हो रही है.
अगापित टेटे, जिला कल्याण पदाधिकारी, देवघर
…तो समय पर कैसे पूरी होगी सबको छत देने की योजना
सरकार ने 2022 तक सबको छत देने की योजना का लक्ष्य रखा है. अगर बिरसा मुंडा आवास की तर्ज पर पदाधिकारियों का यही कार्यशैली रही तो सबको छत देने का लक्ष्य कैसे समय पर पूरा होगा. प्रखंडों में पीएम आवास योजना की भी यही हालत है. धीमी गति से चल रही पीएम आवास में सामुहिक गृह प्रवेश झारखंड स्थापना दिवस पर कराने का लक्ष्य रखा गया है.

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