महुआ की बिक्री कर आत्मनिर्भर बन रही हैं ग्रामीण महिलाएं

परिवार के साथ सुबह ही महुआ चुनने जंगल पहुंत जाती हैं महिलाएं

: परिवार के साथ सुबह ही महुआ चुनने जंगल पहुंत जाती है महिलाएं मयूरहंड. इन दिनों ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं महुआ चुनकर आत्मनिर्भर बन रहीं हैं. महुआ की खुशबू से जंगल व घर महक रहा है. पुरुष के साथ महिलाएं सुबह महुआ चुनने जंगल व गांव के आसपास महुआ पेड़ के पास पहुंच जाते हैं. पुरुष व महिलाएं ने महुआ को अतिरिक्त आर्थिक आमदनी का स्रोत बनाया है. महिला-पुरुष के साथ स्कूली बच्चे भी महुआ चुनने इन दिनों जंगल पहुंच रहे हैं. जगुआर मनीर ने कहा कि महुआ चुनकर एक वर्ष का घरेलू खर्च निकाल लेते हैं. नरसिंह राणा ने कहा कि 20 वर्षों से हर साल महुआ चुनते आ रहे हैं. महुआ बेचने से जो आमदनी होती है, उससे कुछ महीने का खर्च निकल जाता है. सबीना बेगम ने कहा कि महुआ प्राकृतिक अनाज है. इसे खाने में भी इस्तेमाल करते हैं. राबिया खातून, नूरजहां खातून व रुकसाना खातून ने कहा कि महुआ बिना पूंजी का व्यापार है. यह व्यापार ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक अच्छा माध्यम है. सुमित्रा देवी, कुशमी देवी, मनोरवा देवी ने कहा कि महुआ चुनते हैं और इसकी बिक्री से जो आय प्राप्त होती है, उससे कुछ माह घर का खर्च चल जाता है.

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By DEEPESH KUMAR

DEEPESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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