महामस्तकाभिषेक महोत्सव: अंतिम दिन कई अनुष्ठान संपन्न कराये गये इटखोरी. नवनिर्मित भगवान शीतलनाथ की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्रथम महामस्तकाभिषेक महोत्सव का शुक्रवार को समापन हो गया. समापन से पूर्व मोक्ष कल्याणक का अनुष्ठान संपन्न कराया गया. इसके बाद अग्निकुमार इंद्रों का आगमन हुआ और निर्वाण लाडू की रस्म अदा की गयी़ भगवान शीतलनाथ का मस्तकाभिषेक किया गया तथा वेदी पर भगवान को विराजमान कराया गया. साथ ही नवनिर्मित मंदिर के बाहर स्थापित मान स्तंभ का भी अभिषेक हुआ, जिस पर शीतलनाथ जी की प्रतिमा स्थापित की गयी़ मुख्य मंदिर के शिखर पर पीतल का गुंबद स्थापित कर सुशोभित किया गया. हवन के बाद पूर्णाहुति की गयी. समापन की पूर्व संध्या में झुमरीतिलैया के जैन समाज की युवतियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसमें झारखंड के माटी की झलक दिखी. जैन समाज की महिलाओं ने धर्म की अदालत शीर्षक पर नाटक प्रस्तुत किया. इस अवसर पर जैन समाज के कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रविंद्रकीर्ति स्वामीजी ने प्रवचन करते हुए समाज को जनसंख्या वृद्धि पर विचार करने की सलाह दी़ उन्होंने कहा कि एक बच्चे तक सीमित रहने से समाज धीरे-धीरे विलुप्त हो जायेगा. कम से कम चार बच्चे होने चाहिए, तभी पारिवारिक रिश्ते मजबूत रहेंगे. जिस स्थान पर पंचकल्याणक मनाया गया, वहां वर्ष 1981-82 जैन धर्म के 10वें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ का चरण चिह्न मिला था, जो वर्तमान में म्यूजियम में रखा हुआ है. दिगंबर जैन समाज के लोग उक्त स्थान को शीतलनाथ की जन्मभूमि मानते हैं, जिस कारण से मंदिर का निर्माण किया गया. सुनील जैन को भूल गये कमेटी के लोग जिस भूमि पर शीतलनाथ जी का मंदिर निर्माण हुआ है, उसे हासिल करने व मंदिर निर्माण में अपना सबकुछ समर्पित करने वाले सुनील कुमार जैन (पूर्व महामंत्री शीतलनाथ तीर्थ क्षेत्र कमेटी) को समाज के लोग भूल गये. यह इटखोरी, चौपारण में चर्चा का विषय बना हुआ है. मालूम हो कि चार साल पूर्व सुनील जैन का आकस्मिक निधन हो गया था.
प्रतिमा स्थापना के साथ पंचकल्याणक महोत्सव समापन
महामस्तकाभिषेक महोत्सव: अंतिम दिन कई अनुष्ठान संपन्न कराये गये
