Chaibasa News : आदिवासी भाषा व लिपि का संरक्षण हो

चाईबासा के सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में शनिवार को आदिवासी दिवस सादगी एवं पारंपरिक तरीके से मनाया गया.

चाईबासा.

चाईबासा के सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में शनिवार को आदिवासी दिवस सादगी एवं पारंपरिक तरीके से मनाया गया. कार्यक्रम को दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित करते हुए मनाया गया. कार्यक्रम में काफी संख्या में मनोहरपुर, गुवा, नोवामुंडी, जमशेदपुर, रांची सहित राज्य के दूसरे स्थान के लोग भी शामिल हुए. पुजारी द्वारा पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ की गई.इस दौरान विभिन्न टीमों द्वारा सांस्कृतिक नृत्य भी प्रस्तुत किया गया, इसमें भारत मुंडा समाज नृत्य टीम, उरांव समाज बान टोला नृत्य टीम, नदीपार उरांव समाज नृत्य टीम, हो ट्रेडिशनल सुसुन टीम हरिगुटू, संथाल समाज नृत्य टीम, पुूलहातु, उरांव समाज नृत्य टीम, पुलिस लाइन नृत्य टीम, उरांव समाज मेरी टोला नृत्य टीम व हो समाज नृत्य टीम ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया.

परिधान व व्यंजन के 100 स्टॉल लगे

कार्यक्रम स्थल पर पारंपरिक परिधान और व्यंजन के 100 से अधिक स्टॉल लगाये गये थे. इसमें सविता सिंकु, अमर लकड़ा, एसएचजी फेडेरेशन, सेकोर बनम, प्रियंका कालुंडिया, बंधुराम सोय, प्रश्न बिरुआ, सुमी हेम्ब्रम, शशिकला पूर्ति, सुनीता बारी, पीरू होनहागा, पंकज खलखो, बिमला बरहा आदि के स्टॉल लगाये गये थे.

समाज के 50 से अधिक लोग हुए सम्मानित

कार्यक्रम स्थल पर 50 से अधिक लोगों को सम्मानित किया गया. इसमें अभिषेक पिंगुवा, कृति सिंह कुंटिया, प्रियंका हेम्ब्रम, संदीप बांकिरा, रसिका जामुदा, प्रीति देवगम, इपिल अंकिता हेम्ब्रम, अमनदीप बिरुवा, कश्मीरा हेम्ब्रम, अमंत पाड़ेया शामिल हैं. खेल, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण, कला, समाजिक, स्वास्थ्य, पशुपालन, सांस्कृतिक में बसंती बिरहोर, जितेन सोरेन, अजय जोंको, सोम सागर सिंकु, सुमन सौरभ सिंकु, आकाश हेम्ब्रम, लालू कुजुर, विश्वनाथ लकड़ा, पारस खलखो, विवके खलखो, लीसा बरहा, गणेश टोप्पो, अंकुल कच्छप, जयपाल सिरका, रामेश्वर बिरूवा, सुशीला बिरूवा, सोमा जेराई, जवाहर लाल बांकिरा, डॉ हिरेंद्र बिरुवा, श्याम बोबोंगा, वीरसिंह तामसोय, कार्तिक चद्र नाग, डॉ सृष्टि समांता, लखी मुंडा, स्वीटी कुमारी, राज लक्ष्मी सिंकू आदि को सम्मानित किया गया.

वक्ताओं ने रखे विचार

वक्ताओं द्वारा आदिवासी युवाओं का आधुनिक युग में भविष्य और चुनौतियां, आधुनिक युग में आदिवासी भाषा-लिपि का संरक्षण एवं विकास पर चर्चा की गयी. झारखंड में स्थानीय और नियोजन नीति, आदिवासी सरना कोड, अस्मिता और पहचान, स्वायत्त स्वशासन, आदिवासी भाषा दशक में भाषा, धर्म और धर्मांतरण से बचाव विषय पर विचार रखे गये.

कार्यक्रम को सफल बनाने में इनका रहा योगदान

कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के अध्यक्ष इपिल सामड, गणेश पाट पिंगुआ, लाल कुजूर, रवि बिरुली, संजय लागुरी, राजकमल पाट पिंगुआ, अशोक नाग आदि का योगदान रहा. इस अवसर पर मधु कोड़ा, गीता कोड़ा, दशरथ गागराई, प्रशासनिक पदाधिकारी सहित काफी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए.

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Author: AKASH

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