Chaibasa News : वैतरणी नदी बनी कचरे का डंपिंग ज़ोन, दूषित जल से बढ़ा संकट

वेस्टेज और दुर्गंध से कराह रही वैतरणी, प्रशासन मौन

लाखों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा

तस्वीर: 29 जैंतगढ़ 1 वैतरणी पुल जो झारखंड व ओड़िसा को जोड़ती

तस्वीर: 29 जैंतगढ़ 2 पवित्र वैतरणी नदी जो हो रही दूषितप्रतिनिधि, जैंतगढ़

चंपुआ में डायरिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग, एनएसी प्रशासन व जिला प्रशासन सतर्क हो गया है. लगातार होटलों, बेकरी फैक्ट्री व खाद्य सामग्री की दुकानों में छापेमारी की जा रही है. लेकिन इन सबके बीच क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली वैतरणी नदी की शुद्धता खतरे में है.वैतरणी पुल के नीचे जमा हो रहा वेस्टेज, दूषित हो रहा जलस्रोत

चंपुआ और जैंतगढ़ की सीमा पर स्थित वैतरणी पुल के नीचे वेस्टेज और कूड़ा-करकट लगातार जमा हो रहा है. इस पुल के ठीक नीचे पांच इंटेकवेल बने हुए हैं, जिनसे क्षेत्र की बड़ी आबादी को पेयजल आपूर्ति की जाती है. लेकिन हाल के दिनों में नदी में मीट, मछली, ब्रॉयलर वेस्टेज और घरेलू कचरे को फेंके जाने की घटनाएं बढ़ गयी हैं. यह स्थिति न केवल नदी के जल को प्रदूषित कर रही है, बल्कि आसपास की हवा और पर्यावरण पर भी गंभीर असर डाल रही है.

नदी किनारे सड़ रहे कचरे से आ रही दुर्गंध

वेस्टेज और कूड़ा नदी के किनारे झाड़ियों में फंसकर सड़ने लगता है, जिससे तेज दुर्गंध फैल रही है. बरसात के दौरान यह सड़ा हुआ कचरा पानी के साथ बहकर नदी में फैल जाता है, जिससे जल की गुणवत्ता और शुद्धता प्रभावित हो रही है. स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पुल से गुजरने वाले लोगों को नाक पर रुमाल रखकर चलना पड़ता है. दुर्गंध कभी-कभी इतनी तीव्र हो जाती है कि राहगीरों को उबकाई तक आने लगती है.

वैतरणी नदी पर निर्भर हैं लाखों लोग

जैंतगढ़ की लगभग 95% और ओडिशा के चंपुआ की करीब 80% आबादी वैतरणी नदी के जल पर आश्रित है. यही जल पीने, भोजन पकाने और अन्य घरेलू कार्यों में उपयोग होता है. ऐसे में नदी में कूड़ा-कचरा फेंका जाना एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है.

पुल के नीचे वेस्टेज से प्रदूषण का खतरा

दरअसल, चंपुआ और जैंतगढ़ की सीमा पर स्थित वैतरणी पुल के नीचे वेस्टेज जमा हो रहा है. पुल के ठीक नीचे पांच इंटेकवेल बने हुए हैं, जिनसे पूरे क्षेत्र में जलापूर्ति की जाती है. लेकिन, हाल के दिनों में इस नदी में मीट, मछली, ब्रायलर के वेस्टेज और कूड़ा-करकट फेंके जाने की शिकायतें बढ़ी हैं. यह न केवल नदी के पानी को दूषित करता है, बल्कि इससे आसपास की आबोहवा भी खराब हो रही है. पुल के नीचे वेस्टेज और कूड़ा करकट फेंकने से दुर्गंध पैदा हो रही है. कूड़ा करकट नदी के किनारे झाड़ियों में फंस जाता है और सड़ता है. बारिश के दौरान यह सड़ा हुआ कचरा नदी में बहकर फैल जाता है. जिससे नदी की शुद्धता और आसपास के पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है. स्थानीय लोगों को इस दुर्गंध से बचने के लिए पुल पार करते समय रुमाल से नाक दबानी पड़ती है. कई बार तो दुर्गंध इतनी तीव्र हो जाती है कि लोग उबकाई करने लगते हैं.वैतरणी नदी पर निर्भर लाखों लोग

जैंतगढ़ की लगभग 95%और ओड़िसा के चंपुआ की 80% आबादी वैतरणी नदी के पानी पर निर्भर हैं, जो उन्हें पीने, खाना बनाने और अन्य कार्यों के लिए मिलता है.

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Author: AKASH

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