चाईबासा: गिरिडीह जिले के मनियाडीह में मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद सारंडा लगभग नक्सल मुक्त हो चुका है. वर्तमान में सारंडा में मात्र 10 लाख का इनामी नक्सली सालुका कायम ही बचा है. पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित रेनु ने बताया कि सालुका कायम की टीम में अब केवल एक-दो महिलाएं रह गयी हैं.
मजबूत घेराबंदी के कारण सारंडा से भागा मिसिर बेसरा
एसपी ने बताया कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के लिए मजबूत घेराबंदी की गयी. वह मजबूर होकर भागा फिर रहा था. अंततः सारंडा से भागने पर विवश हो गया. उसकी गिरफ्तारी की रणनीति कई महीने पहले ही बन चुकी थी. सुरक्षा बलों ने इतना दबाव बनाया कि उसका रसद और अन्य सभी सप्लाई चेन पूरी तरह ब्लॉक कर दिये गये थे. पुलिस को उसके हर ठिकाने और मूवमेंट की सटीक खुफिया जानकारी (इंटपुट) मिल रही थी.
अब सारंडा में नक्सलियों को पैर नहीं जमाने देंगे
एसपी अमित रेनू ने इसे बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा कि अब सारंडा को नक्सलियों का पनाहगार नहीं बनने दिया जायेगा. नक्सलियों ने न केवल सुरक्षा बलों को निशाना बनाया, बल्कि कई निरीह ग्रामीणों और ग्रामीणों के मवेशियों की जान ली. नक्सलियों द्वारा बिछाये गये लैंडमाइंस की चपेट में आने से कुछ हाथियों की भी मौत हुई थी.
पुलिस और सुरक्षा बलों ने 2020 से 2026 के बीच कड़ा अभियान चलाया
वर्ष 2026 में मुठभेड़ों में कुल 18 नक्सली मारे गये. ऑपरेशन रुतागुटू के दौरान एरिया कमेटी सदस्य इजराइल पूर्ति मारा गया, जिसके पास से दो एसएलआर और 213 कारतूस बरामद हुए. वर्ष 2025 में 10 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया. इसके बाद वर्ष 2026 के मई माह में 25 नक्सलियों और जुलाई माह में 14 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इस प्रकार कुल 49 नक्सलियों ने मुख्यधारा में वापसी की है.
भारी मात्रा में हथियार व नकद बरामद
सुरक्षा बलों ने विभिन्न अभियानों के दौरान भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किये हैं. वर्ष 2025 के सितंबर माह में 4 एके-47, 5 इंसास, 6 एसएलआर, 4 .303 बोल्ट एक्शन, 1 कार्बाइन और 2,291 कारतूस बरामद किये. इसके साथ 3,40,000 रुपये नकद, 23 पीस डेटोनेटर और 5 आइइडी बरामद किये गये. अब तक कुल 4,269 चक्र कारतूस बरामद किये जा चुके हैं.
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बचे नक्सली सरेंडर करें नहीं तो मारे जायेंगेसारंडा से नक्सलियों का कुनबा पूरी तरह टूट चुका है. अब जो दो-तीन नक्सली बचे हैं, वे भी या तो आत्मसमर्पण करेंगे या फिर मारे जायेंगे. अब सारंडा का तेजी से विकास होगा, जिससे वहां के ग्रामीणों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति और अधिक बेहतर बनेगी.
- अमित रेनु, एसपी, पश्चिमी सिंहभूम
