Chaibasa News : नौ साल में नहीं बन सका प्लांट, श्मशान के पास हो रहा कचरा डंप, पहाड़ बनते ही लगा देते हैं आग

नौ साल में नहीं बन सका प्लांट, श्मशान के पास हो रहा कचरा डंप, पहाड़ बनते ही लगा देते हैं आग

चाईबासा. कोल्हान प्रमंडल मुख्यालय चाईबासा शहर के लोग कचरा से परेशान हैं. दरअसल, शहर में 10 करोड़ की लागत से कचरा निस्तारण प्लांट बनाने की योजना नौ साल पहले शुरू हुई थी. अबतक मात्र पीसीसी सड़क बनाने के साथ जमीन समतल किया जा सका है. जमीन की घेराबंदी तक नहीं हुई है. ऐसे में शहर का कचरा श्मशान के पास फेंका जा रहा है. वहां कचरे का पहाड़ बनने पर आग लगा दी जाती है. इससे आसपास के लोग त्रस्त हैं.

कचरा से खाद बनाने की योजना थी

जानकारी हो कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत सूखा और गीला कचरा को छांटकर अलग-अलग कर खाद बनानी है. कुछ दिनों तक कचरा को छांटने के बाद मिट्टी को जमा किया गया था. यह काम अब बंद है.

कचरा उठाव के कंटेनर जर्जर, सड़कों पर गिरती है गंदगी:

वर्ष 2020- 21 में चाईबासा नगर परिषद ने कचरा उठाव के लिए लाखों रुपये खर्च कर लोहे के 30 कंटेनर खरीदे थे. ये काफी जर्जर हो गये हैं. सभी कंटेनर मधु बाजार सब्जी मार्केट के पास पड़े हैं. ऐसे में किसी तरह इक्का- दुक्का कंटेनर का इस्तेमाल किया जा रहा है. शहर का कचरा फिलहाल कंटेनरों से श्मशान के पास लाया जाता है. हालांकि, ज्यादातर कंटेनर जर्जर हैं. इससे रास्ते भर सड़कों पर कचरा गिरता जाता है. इससे आने- जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

शहर में रोज निकलता है 8- 9 टन कचरा:

जानकारी के अनुसार, शहर में रोज 8- 9 टन कचरा जमा होता है. बाजार क्षेत्र से सड़कों के किनारे से कचरा उठा लिया जाता है. मोहल्लों से डोर- टु-डोर कचरा उठाव सप्ताह में एक दिन किया जाता है. ऐसे में कई लोग कचरे को नालियों में फेंक देते हैं. इससे नाली जाम हो जाती है. बारिश होने पर गंदा पानी सड़क पर बहने लगता है. लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

एजेंसी बोली- जमीन उपलब्ध कराने में ज्यादा समय लग गये

पायोनियर एजेंसी के अनुसार, उन्हें जमीन उपलब्ध होने में काफी दिन लग गये. प्लांट के लिए जिस जमीन को चिह्नित किया गया था, उसपर कुछ लोगों ने निजी भूमि बताकर आपत्ति जतायी थी. ऐसे में भूमि की मापी के बाद काम शुरू किया जा सका है. जिस स्थल पर प्लांट बनाना है, वहां पूर्व में करीब 30 फीट गहरी चूना पत्थर खदान थी. यही वजह है कि उक्त भूमि को समतल कराने में लंबा समय लग गया.

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Author: ATUL PATHAK

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