Chaibasa News : चंपुआ में तपिश का कहर, पारा 40 डिग्री के पार, लोग बेहाल

ओडिशा में स्कूलों का संचालन सुबह 6.30 से 10.30 तक, वहीं झारखंड में 7.00 से 1.00 बजे तक

जैंतगढ़. चंपुआ में विगत चार दिनों में तापमान में छह डिग्री का इजाफा हुआ है. चंपुआ में अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री दर्ज किया गया. शुक्रवार को अधिकतम तापमान 34 डिग्री था. शनिवार को बढ़कर 37 डिग्री हो गया. रविवार को 39.2 डिग्री, तो सोमवार को अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री दर्ज किया गया. चंपुआ मौसम विभाग के अनुसार अभी गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है. गर्मी और लू का प्रकोप भी बढ़ेगा. चंपुआ में गर्मी का आलम यह है कि सुबह छह बजे से सूर्य की किरणें चुभने लगती हैं. आठ बजते-बजते गर्मी से बुरा हाल हो जाता है. लोग सुबह दस बजे के बाद बाहर निकलने से कतरा रहे हैं. शाम पांच बजे के बाद ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं. ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चों को भरी दोपहरी में छुट्टी होती है. झारखंड में सरकारी स्कूलों का संचालन सुबह 7.00 से 1.00 बजे तक होता है. कड़ी धूप में लौटते समय बच्चों की हालत खराब हो जा रही है. बढ़ती गर्मी की देखते हुए ओडिशा सरकार ने विद्यालय संचालन का समय सुबह 6.30 बजे से 10.30 बजे तक कर दिया है. झारखंड में इस ओर कोई पहल नहीं की गयी है.

सुबह सात से 10 बजे तक स्कूलों का संचालन हो

झारखंड शिक्षा विभाग का तुगलकी फरमान है. रांची में एसी कमरे में बैठकर निर्णय लेने वाले अधिकारी कोल्हान के बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. – निर्मल तिरिया, अभिभावक

दोपहर एक बजे झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही है. बच्चे हिट वेव की चपेट में आ सकते हैं. सुबह 7.00 से 10.00 बजे तक विद्यालयों का संचालन किया जाये. – सुनील तिरिया, अभिभावकमध्य विद्यालय में तीन से पांच किमी और उच्च विद्यालय में 10 से 15 किमी से बच्चे आते हैं. इतनी कड़ी धूप में घर लौटना जोखिम भरा है. बच्चे डिहाइड्रेशन के शिकार हो रहे हैं. – बादल प्रधान, अभिभावक

शिक्षा विभाग की समय सारिणी व्यवहारिक नहीं है. यह छात्रों को परेशान करने वाला और शिक्षकों को प्रताड़ित करने वाला है. साथ ही अभिभावकों को चिंतित करने वाला आदेश है. जब ओडिशा में 10.30 बजे छुट्टी हो रही है, तो झारखंड में क्यों नहीं. – सत्यनारायण गोपगर्मी को देखते हुए सरकार सुबह सात बजे से दस बजे तक स्कूलों का संचालन करे. सरकार बच्चों के स्वास्थ्य हित में समय सारिणी में परिवर्तन करे. अन्यथा बच्चों के स्वास्थ्य हित में स्कूल भेजने से पहले सोचना पड़ेगा. – रेखा मिश्रा

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Author: ANUJ KUMAR

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