Chaibasa News : जंगल से सटे गांवों के लोग भयभीत, हाथियों को खदेड़ने के लिए बंगाल से टीम बुलायी

नये साल के पहले दो दिनों में हाथियों के हमले में चार लोगों की मौत

चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिले में नये साल के पहले दो दिनों में हाथियों के हमले में चार लोगों की मौत व तीन घायल हो चुके हैं. इससे जंगल से सटे गांवों के लोग भयभीत हैं. उन्हें जीवन की चिंता सताने लगी है. ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की उपेक्षा का दंश हमलोग जेल रहे हैं. अब हाथी दिन दहाड़े गांवों में घुसने लगे हैं. बच्चों को घरों से बाहर निकलने से रोका जा रहा है. अभी स्कूल बंद है, वरना बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया जाता. वन विभाग को टोस पहल करने की जरूरत है. हाथियों के कारण जान-माल को भारी नुकसान हो रहा है. इधर, चाईबासा वन क्षेत्र के पदाधिकारियों ने हाथियों से फसलों व जान-माल की सुरक्षा के लिए बंगाल से हाथी भगाने वाली टीम को बुलाया है. आबादी क्षेत्र में उत्पात मचा रहे हाथियों को दूर जंगल में भगाया जा सके. वहीं, कोल्हान वन क्षेत्र के पदाधिकारी ओडिशा से हाथी भगाने वाली टीम को बुलाने की तैयारी में हैं. वन विभाग के 20-25 वन कर्मियों की टीम गठित की गयी. यह गश्त करने के साथ- साथ हाथियों को उसके कॉरिडोर पर भगाने का काम करेगी.

फसल की रक्षा के लिए रतजगा कर रहे किसान:

क्षेत्र के दर्जनों गांव के ग्रामीण रतजगा कर रहे हैं. कड़कड़ाती ठंड के बावजूद गांव से बाहर हाथों में डंडे और खुद के खर्च से पटाखा और मशाल लेकर रात गुजारने को विवश हैं. क्षेत्र में हाथियों का आतंक है. अपनी खेतों और खलिहानों में रखे अनाजों को बचाने के लिए ग्रामीण रात भर जाग रहे हैं. हाथियों का झुंड लगातार क्षेत्र में विचरण कर रहा है. खेतों में लगी फसलों को खाने से ज्यादा बर्बाद करना. खलिहानों में रखे अनाजों को बर्बाद करने का काम कर रहे हैं, वहीं ग्रामीणों पर जानलेवा हमला कर रहे हैं. इतना ही नहीं हाथियों के झुंड ने घरों को भी क्षतिग्रस्त किया है. इसके कारण ग्रामीणों का रात में सोना मुश्किल हो रहा है. शाम होते ही ग्रामीण अपने घरों में दुबक जा रहे हैं. हाथी शाम होते ही जंगलों से निकलकर गांवों की ओर कूच कर जाते हैं.

चाईबासा- सैयतवा मार्ग पर इक्का-दुक्का लोग दिखे

उधर, हाथियों के भय से शनिवार को चाईबासा- सैयतवा मार्ग पर आम दिनों की अपेक्षा लोगों को आना- जाना कम रहा. उक्त मार्ग सुनसान रहा. हालांकि, यात्री बसों का आवागमन जारी रहा, लेकिन पैदल चलने वाले इक्का- दुक्का लोग दिखे. वहीं, बरकेला मार्ग पर अन्य दिनों की अपेक्षा सुबह और दोपहर में आवागमन काफी काम रहा.

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Author: ATUL PATHAK

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