चाईबासा : कल्याण विभाग की योजनाओं को लेकर अब किसी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिला समाहरणालय स्थित सभागार में शुक्रवार को उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई. डीसी ने अधिकारियों और अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करें और निर्माण कार्य की गुणवत्ता से किसी भी स्थिति में समझौता न हो. बैठक में परियोजना निदेशक आईटीडीए जयदीप तिग्गा सहित सहायक अभियंता, कनीय अभियंता एवं संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे.
सरना-मसना स्थल से चहारदीवारी तक योजनाओं का लिया अपडेट
बैठक के दौरान कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माणाधीन योजनाओं की योजना-वार समीक्षा की गई. इसमें सरना/मसना स्थल, चहारदीवारी निर्माण सहित अन्य आधारभूत संरचनाओं से जुड़े कार्य प्रमुख रूप से शामिल रहे. उपायुक्त ने संबंधित अभियंताओं और पदाधिकारियों से प्रत्येक स्वीकृत योजना की वर्तमान स्थिति, अब तक हुई प्रगति और लंबित रहने के कारणों की जानकारी ली. उन्होंने अधिकारियों से यह भी जाना कि निर्माण कार्य में कहां-कहां तकनीकी अथवा अन्य प्रकार की बाधाएं आ रही हैं.
लंबित योजनाओं को जल्द पूरा करने का निर्देश
डीसी मनीष कुमार ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं का निर्माण कार्य किसी कारण से लंबित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कराया जाए. उन्होंने कहा - किसी भी योजना को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य में आने वाली तकनीकी अथवा अन्य समस्याओं का आपसी समन्वय से शीघ्र समाधान करें, ताकि योजनाओं का निर्धारित समय-सीमा के भीतर क्रियान्वयन और पूर्णता सुनिश्चित की जा सके.
स्वीकृति के बाद समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण काम जरूरी
उपायुक्त ने कहा - किसी योजना की स्वीकृति मिलना अंतिम लक्ष्य नहीं है. स्वीकृत योजनाओं का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन जिला प्रशासन की प्राथमिकता है. उन्होंने निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने और योजनाओं की पूर्णता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया. डीसी ने यह भी कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित समुदाय और लाभुकों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिलना चाहिए. इसके लिए योजनाओं के उपयोग और उनकी उपयोगिता पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है. बैठक में अधिकारियों को निर्माणाधीन योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग करने और प्रगति में किसी तरह की बाधा आने पर तत्काल उच्चाधिकारियों को अवगत कराने का निर्देश दिया गया.
