Chakradharpur News : नगर परिषद को टैक्स देकर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे 500 परिवार

तेज हवा चलने पर गिरता है जलमीनार का प्लास्टर, दुर्घटना की आशंका

चक्रधरपुर शहर में पेयजल संकट, मचा हाहाकार

चक्रधरपुर.

चक्रधरपुर शहर में पेयजल संकट दिन-ब-दिन लगातार गहराता जा रहा है. लगभग पांच दशक पहले पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा निर्मित 3 लाख लीटर क्षमता वाली जलमीनार आज विभागीय उपेक्षा और देखरेख के अभाव में बदहाली का शिकार है. इस कारण 500 परिवारों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस जलमीनार का निर्माण शहरवासियों को नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, पर समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण अब इसकी स्थिति बेहद चिंताजनक हो गयी है.

10 साल से नगर परिषद के अधीन है व्यवस्था

10 साल पहले तक यह जलमीनार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सीधे नियंत्रण में थी. इसके बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी नगर परिषद को सौंप दी गयी. वर्तमान में नगर परिषद के कर्मचारी ही इस जलमीनार का संचालन और पानी सप्लाई का काम देखते हैं. जिसके एवज में उपभोक्ताओं से बकायदा वाटर टैक्स भी वसूला जाता है. इसके बावजूद व्यवस्था को सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं.

इन इलाकों में जलापूर्ति प्रभावित

जलमीनार से नियमित और पर्याप्त पानी की सप्लाई नहीं होने के कारण मेन रोड, थाना रोड, वार्ड संख्या 3, काली मंदिर रोड, पुरानी रांची रोड और पुरानीबस्ती क्षेत्र के लोगों को पानी नहीं मिल रहा है. इन इलाकों के कई परिवारों को पानी का इंतजाम करने के लिए रोजाना सुबह-शाम भागदौड़ करनी पड़ रही है, वहीं कई लोग टैंगर पर निर्भर रहने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि इस जर्जर ढांचे की तुरंत जांच करायी जाये और तत्काल मरम्मत या नए सिरे से इसका पुनर्निर्माण कराया जाये, अन्यथा कभी भी यह भारी-भरकम जलमीनार ढह सकती है और कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

जलमीनार ढहने के डर से टंकी में कम पानी चढ़ाया जा रहा

जलमीनार इतनी कमजोर और जर्जर हो चुकी है कि किसी बड़े हादसे के डर से पानी चढ़ाने वाली मशीन को मात्र 10 से 15 मिनट ही चलाया जा रहा है. कम समय चलने के कारण टंकी पूरी तरह भर नहीं पाती है. नतीजतन, उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है. पहले जहां निर्धारित समय तक भरपूर जलापूर्ति होती थी, वहीं अब लोगों को बेहद सीमित समय के लिए जलापूर्ति की जा रही है.

कोट

नयी टंकी का निर्माण होगा जुस्को से चल रही बात

3 लाख लीटर क्षमता वाली यह जलमीनार पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. पर भीषण गर्मी को देखते हुए जनहित में फिलहाल हर दिन केवल 1.25 लाख लीटर पानी चढ़ाकर ही सप्लाई की जा रही है. इस जर्जर टंकी को ध्वस्त कर इसकी जगह नई टंकी बनायी जायेगी. इसके लिए ठेका कंपनी जुस्को से वार्ता चल रही है.

-विजय कुमार हांसदा, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद

दहशत के साये में काम करते हैं कर्मचारी

यह जलमीनार पूरी तरह क्षतिग्रस्त है. इसके ठीक नीचे हमारा कार्यालय है. हल्की हवा चलने पर भी जलमीनार का प्लास्टर और कंक्रीट नीचे गिरता है. इससे हमलोग लगातार भय के साये में काम करने को मजबूर हैं. यह 10 साल से नगर परिषद के अधीन है, इसलिए विभाग का इससे सीधा लेना-देना नहीं है. इसे ध्वस्त करने के लिए नगर परिषद को कई बार लिखित में अवगत कराया जा चुका है. –

जीतेन्द्र कुजूर, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, चक्रधरपुर

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लेखक के बारे में

Author: ATUL PATHAK

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