चक्रधरपुर : चक्रधरपुर शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मंगलवार को नागों की देवी मां मनसा की पूजा पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई. शहर के दंदासाई सहित कई स्थानों पर मां मनसा की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की गईं. यहां सुबह से ही दर्शन व पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. भक्तों ने फल, फूल, मिठाई अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य व रक्षा की कामना की.
वर्ष में चार संक्रांतियों पर होती है पूजा
स्थानीय परंपरा के अनुसार, मां मनसा की पूजा सावन, भादो, आश्विन और कार्तिक माह की 17वीं तिथि (संक्रांति) पर की जाती है. सावन संक्रांति की पूजा संपन्न होने के बाद अब आगामी 17 सितंबर को भादो संक्रांति पर मां मनसा की आराधना होगी. इसके उपरांत आश्विन व कार्तिक संक्रांति पर भी यह धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा.
क्या है मान्यता
मनसा पूजा को लेकर ग्रामीणों में गहरी आस्था और कई प्राचीन मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. मान्यता है कि मां मनसा नागों की देवी हैं. उनकी पूजा करने से परिवार पर सांपों का भय कम होता है. सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है. धालभूमगढ़ के खरबंदा में करीब 350 वर्षों से चली आ रही मनसा पूजा इसी आस्था और परंपरा का प्रतीक है. ग्रामीणों का विश्वास है कि धालभूम के राजा के समय से यहां मां मनसा की पूजा होती आ रही है. पूजा के दौरान नागों की विधिवत पूजा की जाती है और झापान की परंपरा निभाई जाती है.
