तांतनगर : चाईबासा-भरभरिया मुख्य सड़क पर स्थित बरकुंडिया नदी पर 87 साल पुराना ब्रिटिशकालीन पुल वर्तमान में राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर परेशानी और खतरे का सबब बन चुका है. संकरा होने के कारण यह पुलिया हर वक्त बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रही है.
एक साथ दो गाड़ियों का गुजरना नामुमकिन
पुल की चौड़ाई इतनी कम है कि एक समय में दो वाहन एक साथ आमने-सामने से पार नहीं हो सकते. यदि दोनों तरफ से वाहन आ जाएं, तो जाम की स्थिति बन जाती है. साथ ही पुलिया पर जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है. बारिश के दिनों में पानी पुल के बीचों-बीच जमा हो जाता है. इससे वाहन गुजरते समय गंदा पानी पैदल और दोपहिया सवारों पर पड़ता है.
1939 में हुआ था निर्माण, भारी वाहनों से कांपता है ढांचा
जानकारी के अनुसार, इस पुल का निर्माण ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1939 में हुआ था. यह पुल नदी में पांच पिलरों पर टिका है, जिनमें कंक्रीट और छड़ का इस्तेमाल नहीं किया गया है. वर्तमान में जब भी कोई भारी वाहन इसके ऊपर से गुजरता है, तो पूरा ढांचा कांपने लगता है.
झारखंड-ओडिशा को जोड़ने वाला अहम संपर्क मार्ग
आर्थिक दृष्टिकोण से यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह झारखंड और ओडिशा को आपस में जोड़ता है. इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों मालवाहक व यात्री वाहन गुजरते हैं. हालांकि यह ऐतिहासिक पुल कभी इलाके की शान हुआ करता था, लेकिन बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए अब इसके पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण की तत्काल आवश्यकता है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द नए पुल के निर्माण की मांग की है.
